संयुक्त अरब अमीरात में एक भव्य  मंदिर का निर्माण किया जा रहा है लेकिन अब मंदिर को लेकर यह भी दावा किया जा रहा है कि यह इतना ज्यादा मजबूत होगा कि उसकी उम्र कम से कम 1000 साल से ज्यादा होने वाले सैकड़ों इंजीनियरों की टीम इस भव्य मंदिर के निर्माण में लगी हुई है और अब एक वीडियो जारी कर इस मंदिर के निर्माण के बारे में जानकारियां दी गई कहा कि अबू धाबी राजधानी में बनाया जा रहा संयुक्त अरब अमीरात का पहले हिंदू मंदिर की उम्र कम से कम 1000 वर्ष से अधिक होने वाली है मंदिर बनाने वाली टीम ने एक वीडियो जारी किया है जिसमें मंदिर के निर्माण का काम दिखाया गया है

मंदिर के एक प्रतिनिधि ने खलीज टाइम्स को बताया कि मंदिर के आधार नींव का काम पूरा हो गया है और गुलाबी बलुआ पत्थर लगाने का काम कब शुरू होगा जब कारीगर भारत से आएंगे यूट्यूब पर पोस्ट किए गए एक वीडियो अपडेट में परियोजना से जुड़े सदस्यों ने कहा कि मंदिर का निर्माण ऐतिहासिक पत्थरों से किया जाएगा खलीज टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक धार्मिक नेता और बीपीएस हिंदू मंदिर के प्रवक्ता ब्रह्मविहारी स्वामी ने खुलासा किया कि अमरीका स्थित मंदिर की भूमि में पत्थर की मूरत बिछाई गई वही पत्थर लगाए जायेंगे और मंदिर की देखरेख करने वाली स्वामी ने कहा कि यह काफी मजबूत और काफी ज्यादा कठोर है और खास बात यह है कि मंदिर में लगाने के लिए सफेद संगमरमर और खास डिजाइन बनाए जाएंगे इसके लिए भारत से कारीगरों को बुलाया जाएगा वही मंदिर बनाने के प्रोजेक्ट से जुड़े स्ट्रक्चरल इंजीनियर डॉक्टर कोन सा युग ने कहा कि वह इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बनकर सम्मानित महसूस कर रहे हैं और इस मंदिर की उम्र 1000 साल से अधिक होगी

बीएपीएस ने कहा है कि मंदिर बनाने में करीब 888 करोड रुपए का खर्च आने वाला है नीव की डिजाइन के बारे में बात करते हुए बीएपीएस के प्लानिंग सेल के संजय पारीख ने बताया कि मंदिर का निर्माण पूरी तरह से पत्थरों से हो रहा है और हमारे प्राचीन शास्त्रों के मुताबिक मंदिर के निर्माण में लौह धातु का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा उन्होंने कहा कि मंदिर की नींव को काफी मजबूत करने के लिए फ्लाई एश   का इस्तेमाल किया गया है जिसमें सीमेंट और कंक्रीट का इस्तेमाल किया जाएगा जिसमें इसके कार्बन फुटप्रिंट को कम कर दिया है

बीएपीएस की परियोजना निदेशक जसवीर सिंह साहनी ने कहा कि कंक्रीट को मजबूती देने के लिए बांस की छड़े उपयोग करने की अनूठी भारतीय तकनीक का इस्तेमाल किया गया है मित्रों बीएपीएस ने कहा कि हिंदू इतिहास में पहली बार ऐसे मंदिर का निर्माण होने जा रहा है जिसका डिजाइन भव्य से भव्य बनाया गया है विज्ञान का पूरा ध्यान रखा गया हे  इसके अलावा अलगअलग लेवल पर 300 से ज्यादा सेंसर लगाए गए जो मंदिर निर्माण के दौरान स्ट्रेस टेंपरेचर और घटनाओं की लाइव जानकारी इंजीनियर को देती रहेगी आपको बता दें कि पीएम मोदी ने मंदिर की नींव डाली थी यहां लगभग सब कुछ तैयार हो चुका है हाथों से तराशे गए पत्थरों में भारत की समृद्ध संस्कृति और इतिहास की झलक देखने के साथ अरब के प्रतीक भी होंगे इसमें रामायण महाभारत आज हिंदू पुराणों के प्रसंगों से जुड़े चित्र भी होंगे मंदिर का निर्माण प्राचीन हिंदू शास्त्र के मुताबिक किया जा रहा है मंदिर के लिए गुलाबी पत्थर राजस्थान से और मार्बल इटली से मंगाया गया है

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