श्री कृष्ण को हिंदू धर्म में पूर्ण अवतार माना गया है इस धरती पर उनसे बड़ा ईश्वर तुल्य कोई नहीं है इसलिए उन्हें पूर्ण अवतार कहा गया है कृष्ण ही गुरु और सखा है कृष्ण ही भगवान हे कृष्ण है राजनीति धर्म दर्शन और योग का पूर्ण वक्तव कृष्ण को जानना और उन्हीं की भक्ति करना ही हिंदुत्व का भक्ति मार्ग हे अन्य की भक्ति भ्रम भटका और निर्णय जनता की मांग पर ले जाती है आज के समय में ऐसे लोगों की कमी नहीं है जो कहते हैं भगवान श्री कृष्ण का कोई अस्तित्व नहीं है तो उन महा मुर्ख के  निराधार प्रश्नों का उत्तर देने के लिए नहीं बल्कि परमावतार श्री कृष्ण के आज हम आपको पांच प्रमाण बताने वाले हैं जिन्हें आप को जानना आवश्यक है बात करते हैं

)भगवान कृष्ण के जन्म का पुरातत्व में पहला परमाणु धर्म की तरफ से मिले प्रमाण भी यही बताते हैं कि भगवान का जन्म मथुरा में हुआ है बात है सन 1917 की जगत आश्रम नारायण मंदिर रामघाट में खुदाई के दौरान एक शिला मिला जिसे राजकीय संग्रहालय में रखवा दिया गया इसमें वासुदेव भगवान श्री कृष्ण को अपने सिर पर टोकरी में रखकर यमुना पार कर ले जा रहे हैं इसमें कालिया नाग की रक्षा कर रहा है पूर्व सहायक शर्मा बताते हैं कि शिलापट लगभग 2 हजार वर्ष  से भी ज्यादा पुराना है भगवान श्रीकृष्ण से संबंधित है एक और शिलापट में भगवान ने गोवर्धन पर्वत उठा रखा है

) हाल ही में ब्रिटेन में रहने वाले शोधकर्ता ने खगोलीय घटनाओं पुरातात्विक तथ्यों के आधार पर कृष्ण जन्म और महाभारत युद्ध के समय का सटीक वर्णन किया है ब्रिटेन में कार्यरत न्यूक्लियर मेडिसिन के फिजीशियन डॉ मनीष पंडित ने महाभारत में वर्णित 150 घटी  घटनाओं के संदर्भ में कहा कि महाभारत का युद्ध 22 नवंबर 3067 ईसा पूर्व हुआ था उस वक्त भगवान श्री कृष्ण से 56 वर्ष के थे

)द्वारिका और पुरातत्व विभाग ने संयुक्त रूप से शुरुआत की भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के निदेशक एके सिन्हा के अनुसार द्वारिका में समुद्र के भीतर ही नहीं बल्कि जमीन पर भी खोज की गई थी और 10 मीटर गहराई तक जाँच किए गये भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग ने पानी अंदर द्वारिका नगरी को खोजा और वहां मिले अवशेषों को परखा उन्होंने कहा कि यह द्वारिका नगरी महाभारत में वर्णित कथा के अनुसार है उनका कहना था कि द्वारिका नगरी वही है जो महाभारत में वर्णित द्वारका है इसलिए श्रीकृष्ण भी है यह साबित होता है

)महाभारत श्री कृष्णा द्वारा लिखा गया ग्रंथ है जो वर्तमान में मौजूद है इस ग्रंथ में लिखा हुआ हर शब्द भगवान श्री कृष्ण ने अर्जुन से कहा था और महाभारत कि हर श्लोक पर एक नई पुस्तक लिखी जा सकती है सीमांत आर्यभट्ट के अनुसार महाभारत युद्ध 3137 ईसा पूर्व में हुआ था नवीनतम शोध अनुसार यह 3067 ईसा पूर्व में हुआ था इस युद्ध के 35 वर्ष पश्चात भगवान कृष्ण ने देह छोड़ दी थी और तभी से कलयुग का आरंभ माना जाता है

) वृन्दावन में स्थित निधिवन एक अत्यंत पवित्र रहस्यमई धार्मिक स्थान है निधिवन में आज भी श्री कृष्ण और राधाजी रास रचते हे मंदिर परिसर में शयन के लिए पलंग लगाया जाता हे प्रसाद लगाया जाता है सुबह बिस्तर से देखने से प्रतीत होता है कि यह निश्चित ही रात्रि को कोई विश्राम करने आया था लगभग ढाई एकड़ क्षेत्रफल में फैले निधिवन के वृक्षों की यह खासियत है कि यह इनके तनिश सीधे नहीं मिलेंगे और इन वृक्षों की डालियों नीचे की ओर ज़ुकी होती हे जो भी यह रासलीला देख लेता हे वह गुगा पागल बहरा हो जाता है ताकि वह रासलीला के बारे में किसी को भी ना बता सके ऐसा कई लोगों के साथ हो भी चुका है