महाभारत का युद्ध बहोत ही विनाशकारी था पर एक सवाल जो सबके मैं के बिच उठता हे महाभारत के बाद विधवा महिलाओं का क्या हुआ था वह कहां गई थी और उन्होंने किस तरह से अपने वंश को आगे बढ़ाया युद्ध चाहे किसी का भी हो या फिर युद्ध किसी भी कारणवश लड़ा गया हो लेकिन अगर युद्ध में होने वाले नुकसान के बारे में देखा जाए तो सबसे ज्यादा नुकसान युद्ध में लड़े जाने वाले सैनिकों की पत्नियों का होता है इस प्रकार से धर्म और अधर्म की लड़ाई हुई थी महाभारत के युद्ध में पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत युद्ध पौराणिक युग में लड़ा गया सबसे लंबा युद्ध था कुरुक्षेत्र के युद्ध में बहुत से योद्धाओं ने भाग लिया था जो वीरगति को प्राप्त हो गए थे इस युद्ध में भी कई सैनिकों ने भाग लिया था कुछ सैनिक युद्ध में बचे थे लेकिन सोचिए क्या हुआ होगा युद्ध में मारे जाने वाले सैनिकों की पत्नियों के साथ आज हम आपको बताएंगे महाभारत के युद्ध के बाद सैनिकों की पत्तियों का क्या हुआ 

            महाभारत युद्ध के 15 वर्ष बाद युधिष्ठिर हस्तिनापुर के राजा बन गए थे और पांडवों की माता कुंती धुतरास्ट्र और गांधारी सन्यास लेकरआश्रम में रह रहे थे इसी दौरान सहदेव के मन में अपनी माता कुंती से मिलने की इच्छा जागृत हुई सभी भ्राता सहदेव की बात सुनकर अपनी माता कुंती से मिलने के लिए जाने की तैयारी करने लगे लेकिन पांडवों के साथ हस्तिनापुर नरेश युधिष्ठिर और पांडवों समेत हस्तिनापुर की सारी प्रजा उनके साथ साथ चल पड़ी उनकी प्रजा में सबसे ज्यादा विधवा महिलाएं थी जिनके पति महाभारत के युद्ध में मारे गए थे यह सभी लोग धुतराष्ट्र के आश्रम के आसपास 1 महीने तक रुके हुए थे एक दिन ऋषि वेदव्यास जी जिसे पांडवों का पितामह भी कहा जाता है वह धुतराष्ट्र के आश्रम में पांडवों से मिलने पहुंचे ऋषि वेदव्यास ने देखा कि पांडवों सहित हस्तिनापुर के सभी वासी अपने घरवालों और अपने बंधुओं की मृत्यु के शोक में डूबे हुए हैं जो महाभारत के युद्ध के दौरान मारे गए थे उन्हें शोक में डूबा देख वेदव्यास जी ने कहा मैं तुम्हें स्वर्ग और अन्य लोक में वास कर रहे तुम्हारे घरवालों और भाई बंधुओं से तुम्हें मिलूंगा तब तक तुम सभी उनसे मिलकर उनका हाल पूछ लेना शाम को वेदव्यास जी उन सभी को गंगा किनारे ले गए और गंगा के जल में खड़े होकर सूर्यास्त के बाद उन्होंने अपनी तपस्या के बल पर महाभारत के युद्ध में वीरगति को प्राप्त हुए योद्धाओं को बुला लिया सभी मृत्यु को प्राप्त हुए योद्धा गंगा नदी के जल से इस प्रकार बाहर निकले उनका निवास स्थान गंगा ही हो वह गंगा में ही बास कर रहे हो सभी अपने घरवालों और भाई बंधुओं से मिले और उनका हालचाल जानने लगे इस प्रकार अपने घरवालों और परिजनों को मिलकर उन सभी की मृत्यु का गम  तो उनके मन से हमेशा के लिए समाप्त हो गया 

       कुछ समय बाद ऋषि वेदव्यास की तपस्या के बल पर आए सभी योद्धा अदृश्य होकर अपने अपने लोको में वापस चले गये तब महर्षि वेदव्यास ने वीरगति को प्राप्त हुए योद्धाओं की पत्नियों से कहा जो स्त्री अपने पति के साथ उनके लोग जाना चाहती है तो वह पवित्र गंगा की अपना जीवन अपने पति के पास जाती है तब महर्षि वेदव्यास जी की बात सुनकर सभी विधवाए अपने पति से असीम प्रेम के कारण गंगा नदी के पवित्र धारा में कूद पड़ी अपने प्राण त्याग कर अपने पतियों के पास चली गई इस प्रकार महाभारत की विधवा महिला अपने पतियों के पास वापस चली गई थी