शेषनाग वासुकि और तक्षक नाग के बारे में तो आपने  सुना ही होगा आज हम आपको बताने जा रहे हैं आखिर कौन था सबसे खतरनाक नाग ताकि आप भी इस रहस्य से पर्दा उठा सके हिन्दू धर्म के पुराणों में कुछ नाग और नागिन का उल्लेख मिलता है नाग भारतवर्ष में वैसे भी धार्मिक दृष्टि से काफी महत्व रखते हैं महाभारत से लेकर कई पौराणिक कथाओं में इनकी कहानियां पढ़ी जा सकती है शेष नाग वासुकी तक्षक कालिया मनसा देवी भैरवनाथ कहीं प्रस्तुत नाग नागिन है जिनके बारे में जानने और सुनने को मिलता है चलिए जानते हैं इसी क्रम में

     सबसे पहले शेषनाग के बारे में आपने कई पौराणिक कथाओं में इनका नाम सुना होगा धार्मिक मान्यता है कि शेषनाग सब नाग में सर्वश्रेष्ठ है यह भी कहा जाता है कि इन्हीं के फन पर समस्त संसार टिका हुआ है शेषनाग का निवास पाताल लोक में बताया जाता है हमने पुराने चित्रों में भी देखा है कि भगवान नारायण इन्ही के ऊपर ही विश्राम करते हैं पुराणों के अनुसार नागराज संसार से विरक्त हो गए थे कहा जाता है कि पारिवारिक द्वेष के कारण संसार का मोह त्यागना चाहते थे उनकी मां भाई और उनकी सौतेली माता वृंदा और गरुड़ थे जिनमें आपसी वेर भाव था इसीलिए माता और भाइयों को त्यागकर गंधमादन पर्वत पर उन्होंने तपस्या की मान्यता अनुसार भगवान ब्रह्मा ने तपस्या से प्रभावित होकर वरदान दिया और पाताल लोक का राजा बना दिया शेषनाग भगवान नारायण के सेवक हैं मान्यता के अनुसार शेषनाग के 1000 सिर हे इन का कभी अंत नहीं हो सकता इसीलिए इन्हें अनंत भी कहा जाता है तो आपको जानकर हैरानी होगी कि शेषनाग सबसे बड़े भाई हैं उसके बाद आते हैं वासुकी और तक्षक नाग यह सब भाई है


बासुकी शेषनाथ के छोटे भाई थे शेषनाग के पाताल लोक के नीचे जाते यथार्थ जनलोक में जाते ही उनके स्थान पर उनके छोटे भाई वासुकी का राजतिलक करके उनको राजपाट सौंप दिया गया भगवान शिव का परम भक्त होने के कारण वासुकि उनके शरीर पर निवास करते थे शेषनाथ के बाद नागों के दूसरे राजा वासुकी ही थे वासुकी के बारे में धार्मिक मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान देवताओं और राक्षसों ने मंदराचल पर्वत की मन्थनी और बासुकीनाथ को ही रस्सी के तौर पर प्रयोग किया था वासुकी को देवताओं के तीर्थ में नागराज के पद पर बिठाया था वासुकि नाग बहुत ही भीम काय एक और लंबे स्वरूप के थे वही दोस्तों वासुकी ने नाग वंश के अस्तित्व की रक्षा के लिए अपनी बहन का विवाह जड़ता गुरु से करवा दिया था मान्यता है कि वह पुत्र आस्तिक ने नागयज्ञ के समय सर्पो की रक्षा की थी

  चलिए अब जानते हैं तीसरे भाई के बारे में यानी कि तक्षक के बारे में दोस्तों पौराणिक कथा के अनुसार तक्षक पाताल लोक के रहने वाले 8 नाग में से एक है तक्षक का उल्लेख महाभारत में मिलता है वही शृंगीय ऋषि के श्राप के चलते राजा परीक्षित को दसा था जिससे उनकी मृत्यु हो गई थी कहा जाता है इसका बदला लेने के लिए परीक्षित के पुत्र जन्मेजय ने यज्ञ किया और यज्ञ कुंड में अनेक सर्प आकर गिरने लगे इस तरह नागवंश खतरे में आ गया ऐसा होता देख कर तक्षक जान बचाने के लिए देवराज इंद्र के पास गया जैसे ही तक्षक का नाम लेकर यज्ञ की आहुति डाली गई वह यज्ञ कुंड में गिरने लगा तभी आस्तिक ऋषि ने किसी ने मंत्रोच्चारण से तक्षक को आकाश में ही रोक दिया और आस्तिक मुनि के कहने पर जन्मेजय ने यज्ञ पर भी रोक लगा दी इस तरह तक्षक के प्राणों की रक्षा हुई

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