त्रेता युग में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी के अवतार राम और सीता राजा दशरथ की मृत्यु के पश्चात पिंड दान हेतु विहार स्थित बोधगाया पहुंचे उस समय कुछ ऐसी घटना हुई जिसके कारण माता सीता ने 4 लोगों को ऐसा श्राप दिया जिसका प्रभाव आज तक है कौन है वह चार लोग जो आज भी माता सीता का दिया हुआ श्राप भुगत रहे हैं बोधगया पहुंचने के पश्चात भगवान राम और लक्ष्मण पिंड दान की सामग्री लेने गए परंतु दोनों भाइयों के आने में विलंब होने के कारण पिंडदान का समय निकला जा रहा था तब अचानक राजा दशरथ ने स्वयं दर्शन दिए और पिंडदान करने के लिए कहा उन्होंने कहा उन्हें भूख लगी है तब सीता ने उत्तर दिया कि उन्हें उनके पुत्रों के आने तक प्रतीक्षा करनी होगी जिससे वे तीनों उन्हें चावल और तेल के पिंड बना कर दान कर सकेंगे परंतु दशरथ ने प्रतीक्षा करने से मना कर दिया और माता सीता से फल्गु नदी के किनारे की रेत से पिंड बनाकर दान करने के लिए कहा तब राम तथा लक्ष्मण के आने से पहले ही माता सीता ने पूरी विधि विधान के साथ पिंड दान कर दिया उस समय जो वहां पांच साक्षी थे अर्थात माता सीता को पिंडदान करते हुए देख रहे थे वह क्रमशाह अक्षय वट अर्थात बट का वृक्ष फल्गु नदी एक गाय एक तुलसी का पौधा और एक ब्राह्मण थे जब राम और लक्ष्मण लौट कर आए और पिंडदान के विषय में पूछा तब माता सीता ने समय का महत्व बताते हुए कहा कि उन्होंने पिंडदान कर दिया है

   अपनी बात का सत्यापन करने के लिए सीता ने उन पांचों से राम को सत्य बताने के लिए कहा परंतु वटवृक्ष के अलावा सब ने असत्य बताया नदी गाय तुलसी और ब्राह्मण ने कहा कि सीता मां ने पिंडदान नहीं किया है तब स्वयं राजा दशरथ की आत्मा ने भगवान राम और लक्ष्मण के सामने यह स्वीकारा कि सीता ने विधि विधान के साथ पिंडदान किया है तब सीताजी का सत्य सिद्ध हुआ परंतु यह वृत्तांत यहां नहीं समाप्त हुआ सीता जी ने उन चारों को शाप दिया फल्गु नदी को श्राप मिला कि गाया में नदी केवल पृथ्वी के नीचे ही बहेगी और ऊपर से सदैव सुखी रहेगी गाय को श्राप मिला कि गाय की हर घर में पूजा तो होगी परंतु फिर भी उसे झूठा भोजन खाना पड़ेगा तुलसी को श्राप मिला कि गाया में कोई भी तुलसी का पौधा नहीं होगा ब्राह्मण को श्राप मिला कि गाया कि ब्राह्मण कभी जीवन में संतुष्ट नहीं होंगे और सदैव दरिद्रता में ही जिएंगे और अंत में सीता जी ने वटवृक्ष को वरदान दिया कि जो भी गाया में पिंडदान करने के लिए आएगा वह वटवृक्ष को भी पिंडदान करेगा तो दोस्तों इस प्रकार सीता माता का श्राप वहां उपस्थित 4 साक्षी आज भी भोग रहे हैं

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