महाबली हनुमानजी ४ कारनो से सभी देवताओं में श्रेष्ठ माने जाते हैं पहला यह कि वह एक रियल सुपरमैन हे दूसरा यह कि वे पावरफुल होने के बावजूद ईश्वर के प्रति समर्पित है तीसरा यह कि वे अपने भक्तों की सहायता तुरंत ही करते हैं और चौथा या कि वह आज भी सा शरीर मौजूद है इस ब्रह्मांड में ईश्वर के बाद यदि कोई शक्ति है तो वह है हनुमान जी महावीर विक्रम बजरंगी बली के समक्ष किसी भी प्रकार की मायावी शक्ति ठहर नहीं सकती 

   आखिर हनुमान जी अमर क्यों है और यदि वह अमर है तो फिर कहां है आखिर ऐसा कौन सा प्रमाण है जो आज भी जीवित है और ऐसा वह कौन सा स्थान है जहां हनुमान जी आज भी आते हैं और वह भी सहशरीर एक रिपोर्ट की भी बात करेंगे मित्रों जो काफी रिसर्च के बाद प्रकाशित की गई है हनुमान जी कलयुग के अंत तक अपने शरीर में ही रहेंगे मैं आज भी धरती पर विचरण करते हैं हनुमानजी को धर्म की रक्षा के लिए अमरता का वरदान मिला था इस वरदान के कारण आज भी हनुमान जी जीवित और भगवान के भक्तों तथा धर्म की रक्षा में लगे हुए हैं जब कल्कि रूप में भगवान विष्णु अवतार लेंगे तब हनुमान परशुराम अश्वत्थामा कृपाचार्य विश्वामित्र विभीषण और राजा बलि सार्वजनिक रूप से प्रकट हो जाएंगे मित्रों कलयुग में श्री राम का नाम लेने वाले और हनुमान जी की भक्ति करने वाले ही सुरक्षित रह सकते हैं हनुमानजी अपार बलशाली और वीर हैं उनका कोई सानी नहीं धर्म की स्थापना और रक्षा का कार्य 4 लोगों के हाथों में हे दुर्गा भैरव हनुमान और कृष्णा और हनुमान जी मनुष्य अगर पूर्ण श्रद्धा और विश्वास से हनुमानजी का आश्रय ग्रहण कर ले तो फिर तुलसीदासजी के भाती हनुमान और राम दर्शन होने में देर नहीं लगेगी कलयुग में हनुमान जी ने अपने भक्तों को उनके होने का आभास कराया है यह वचन हनुमान जी ने तुलसीदास रहे थे कि चित्रकूट के घाट पर भई संतन की भीर तुलसीदास चंदन घिसे तिलक देत रघुवीर

     हनुमान जी कलयुग में गंधमादन पर्वत पर निवास करते हैं ऐसा श्रीमद्भाभागवत में वर्णन आता है अपने अज्ञातवास के समय हिमवंत पार करके पांडव गंधमादन पर्वत के पास पहुंचे थे तभी की बात है कि भीम सहस्त्रदल कमल लेने के लिए गंधमादन पर्वत के वन में गए थे जहां उन्होंने हनुमान को लेटे देखना और फिर हनुमान जी ने उनका घमंड चूर कर दिया था गंधमादन पर्वत का उल्लेख कई पौराणिक हिंदू धर्म ग्रंथों में हुआ है महाभारत की पूरा कथाओं में भी गंधमादन पर्वत का वर्णन प्रमुखता से आता है हिंदू मान्यताओं के अनुसार माना जाता है कि यहां के विशालकाय पर्वतमाला और वन क्षेत्र में देवता भ्रमण करते हैं गंधमादन पर्वत पर किसी भी वाहन से नहीं पहुंचा जा सकता हम बात कर रहे हैं हिमालय कैलाश पर्वत के उत्तर में स्थित गंधमादन पर्वत की यह पर्वत कुबेर के राज्य क्षेत्र में था सुमेरु पर्वत चारों दिशाओं में से एक को उस काल में गंधमादन पर्वत कहा जाता था आज यहां क्षेत्र तिब्बत के इलाके में बात करते हैं उस रिपोर्ट के बारे में इसमें कहा गया है कि प्रत्येक 41 साल बाद हनुमान जी लंका के जंगलों में प्राचीन काल से रह रहे आदिवासियों से मिलने आते हैं यह  setuasia वेबसाइट पर प्रकाशित की गई हे इस वेबसाइट के अनुसार श्रीलंका के जंगलों में कुछ ऐसे लोगों का पता चला है जिनसे हनुमान जी मिलने आते हैं लोगों पर अध्ययन करने वाले आध्यात्मिक संगठन सेतु के अनुसार 2014 में हनुमान जी इन लोगों से मिलने आए थे अब हनुमान जी 41 साल बाद मिलने आएंगे आदिवासी समूह के लोगों को मातंग नाम दिया गया है उल्लेखनीय है कि कर्नाटक में पंपा सरोवर के पास मातंग ऋषि का आश्रम है जहां हनुमान जी का जन्म हुआ था वेबसाइट सेतु एशिया ने दावा किया कि 27 मई 2014 को हनुमान जी श्रीलंका में मातंगों के साथ थे सेतु के अनुसार कबीले का इतिहास रामायण काल से जुड़ा है कहा जाता है कि भगवान राम के स्वर्ग चले जाने के बाद हनुमान जी दक्षिण भारत के जंगलों में लौट आए थे और फिर समुद्र पार लंका के जंगलों में रहने लगे जब तक पवन पुत्र श्री लंका के जंगलों में रहे वहां के लोगों ने उनकी बहुत सेवा कि जब हनुमान जी वहां से जाने लगे तब उन्होंने वादा किया कि 41 साल बाद आकर वहां के कबीले की पीढ़ियों को ब्रह्म ज्ञान देंगे कबीले का मुखिया हनुमान जी के साथ की बातचीत को एक लॉग बुक में दर्ज करता है सेतु नामक वेबसाइट यह लॉगबुक का अधययन करके इस बात का खुलासा करने का दावा करता है आपको पसंद आया हो तो लाइक करें

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