क्या शिवलिंग रेडियो एक्टिव होते हैं क्या आपको पता है कि जब नासा द्वारा भारत के शिवलिंग ऊपर कुछ रिसर्च की गई तो क्या निष्कर्ष निकला क्या आपको पता है उज्जैन से लेकर के 7 ज्योतिर्लिंगों के बीच की जो दूरी है उसके बीच के रहस्य ने पूरी दुनिया को हिला कर रख दिया

शिवलिंग रेडिओएक्टिव  होते यह बात सौ प्रतिशत सत्य है भारत का रेडियो एक्टिव मैप उठा ले तो हैरान हो जाएंगे भारत सरकार के न्यूक्लियर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है 

और शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्यूक्लियर रिएक्टर्स ही तो है तभी तो उन पर जल चढ़ाया जाता है ताकि वह शांत रहें महादेव के सबसे प्रिय पदार्थ जैसे कि बेलपत्र धतूरा आग सभी न्यूक्लियर एनर्जी सोखने वाले हे शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी एक्टिव हो जाता है इसलिए तो जल निकास नलिका को लांघा नहीं जाता

भावा एटॉमिक रिएक्टर का डिजाइन भी शिवलिंग की तरह ही है शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ जल नदी के बहते हुए जल के साथ मिलकर औषधि का रूप ले लेता है तभी तो हमारे पूर्वज हम लोगों से कहते थे कि महादेव शिव शंकर नाराज हो जाएंगे तो प्रलय आ जायेगा

हमें ध्यान देना चाहिए कि हमारी परंपराओं के पीछे इतना ज्ञान विज्ञान छुपा हुआ है हमें गर्व होना चाहिए कि जिस संस्कृति की कोख से जन्म लिया है विज्ञान को परंपराओं का जामा इसलिए बनाया गया है ताकि प्रचलन बन जाए और हम भारतवासी सदा वैज्ञानिक जीवन जीते रहे

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि भारत में ऐसे महत्वपूर्ण शिव मंदिर केदारनाथ से लेकर रामेश्वरम तक सभी ज्योतिर्लिंग एक ही सीधी रेखा में बनाए गए आश्चर्य है कि हमारे पूर्वजों के पास ऐसा कैसा विज्ञान और तकनीक थी जिसे हम आज तक समझ नहीं पाए

उत्तराखंड का केदारनाथ केरला का कालेश्वर आंध्र प्रदेश का कालहस्ती तमिलनाडु का एकाम्बरेश्वर चिदम्बरेश्वर और रामेश्वरम एक सीधी रेखा में बनाया गया है जो प्रकृति के पांच तत्वों की अभिव्यक्ति का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसे आम भाषा में पंचमहाभूत कहते हैं यानी पृथ्वी जल अग्नि वायु अंतरिक्ष तत्वों के आधार पर 5 शिवलिंग को स्थापित किया गया है

यह मंदिर योग विज्ञान के अनुसार बनाया गया था और एक दूसरे के साथ में रखा गया है इसके पीछे विज्ञान होगा जो मनुष्य के शरीर पर प्रभाव करता होगा इसका निर्माण ५००० वर्ष पूर्व किया गया था स्थानों की अक्षांश और देशांतर को मापने के लिए कोई उपग्रह तकनीक उपलब्ध नहीं थी तो फिर कैसे सटीक रूप से 5 मंदिरों को प्रतिस्थापित किया गया होगा उत्तर भगवान ही जाने

अब आपको बताते हैं महाकाल उज्जैन शेष ज्योतिर्लिंगों के बीच दूरी का रहस्य उज्जैन से सोमनाथ की दूरी 777 किलोमीटर उज्जैन से ओम्कारेश्वर 111 किलोमीटर उज्जैन से भीमाशंकर 666 किलोमीटर उज्जैन से काशी विश्वनाथ 999 किलोमीटर उज्जैन से मल्लिकार्जुन 999 किलोमीटर उज्जैन से केदारनाथ 888 किलोमीटर उज्जैन से त्र्यंबकेश्वर 555 किलोमीटर उज्जैन से बैजनाथ 999 किलोमीटर उज्जैन से रामेश्वरम 1999 किलोमीटर उज्जैन से घृष्णेश्वर 555 किलोमीटर हिंदू धर्म में कुछ भी बिना कारण के नहीं होता था

उज्जैन पृथ्वी का केंद्र माना जाता है जो सनातन धर्म में हजारों साल से मानते आ रहे हैं इसलिए उज्जैन में सूर्य की गणना के लिए मानव निर्मित यंत्र भी बनाए गए करीब 2050 वर्ष पहले और काल्पनिक रेखाएं कर्क रेखा कहते हैं वैज्ञानिक द्वारा बनाई गई आज भी वैज्ञानिक उज्जैन आते हे  सूर्य और अंतरिक्ष की जानकारी के लिए 

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