हनुमान मारुती से हनुमान क्या कारण था जिससे मारुति का नाम हनुमान पड़ गया आखिर क्यों इंद्र ने बालक मारुती पर वज्र का प्रहार किया पवन पुत्र हनुमान के बारे में कहा जाता है कि वह आज भी जिंदा है और एक कलयुग तक जिंदा रहने का वरदान प्राप्त है लेकिन उन्हें यह वरदान क्यों मिला हनुमान जी की वीरता के बारे में हर कोई जानता है लेकिन क्या आप जानते हैं कि आखिर संकट मोचन हनुमान जी की एक खास रोचक कथा आखिर उनका मारुति से हनुमान नाम कैसे पड़ा

हिंदू धर्म के अनुसार यह घटना मारुति जी के बाल्यावस्था की है एक दिन जब मारुति अपनी नींद से जागे और तेज भूख लगी तब व्याकुल मारुति उठकर माता अंजनी को आसपास ढूंढने लगे लेकिन उन्हें माता अंजनी कहीं नहीं मिली मारुति की भूख धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी जिसके पश्चात उन्हें एक वृक्ष पर एक पका हुआ लाल फल दिखाई दिया

उनकी भूख मिटाने के लिए मारुति फल को खाने के लिए निकल पड़े मारुति जी को जो पेड़ पर फल लगा रहा था वह कुछ और नहीं बल्कि भगवान सूर्य देव थे अमावस के दिन होने के कारण राहु सूर्य को ग्रहण लगाने वाले ही थे इसे  पहले ही हनुमानजी ने सूर्य को निगल गए यह देख राहु इंद्रदेव के पास गए और उन्होंने उनसे सहायता मांगी इसके बाद इंद्रदेव ने बार-बार मारुति से आग्रह किया कि वह सूर्य देव को मुक्त करते इंद्रदेव के बार-बार आग्रह करने पर भी हनुमान जी ने अपने बाल हठ के कारण सूर्य देव को मुक्त नहीं किया

सूर्य देव को मुक्त करने के लिए इंद्र ने क्रोध में आकर मारुति पर अपने वज्र से प्रहार किया मारुति पर प्रहार की वजह से सूर्य  देव तो मुक्त हो गए लेकिन मारुति मूर्छित होकर आकाश से धरती की तरफ गिर गए जब इस घटना के बारे में मारुति के पिता पवनदेव को पता चला तो अत्यंत क्रोधित हो गए और मारुति को एक गुफा में ले जाकर अंतर्ध्यान हो गए पवन देव ने अपने क्रोध से समस्त संसार की हवा को रोक दिया और संसार में वायु बंद हो गई जिसकी वजह से पृथ्वी पर सभी जीवो में त्राहि-त्राहि मची

इस विनाश को रोकने के लिए सभी देवता गण पवनदेव से विनंती करने लगे कि वे अपने क्रोध को त्याग कर पृथ्वी पर प्राण वायु का प्रवाह करें तब पवन देव ने उनकी विनती को स्वीकार किया जिसके बाद सभी देवो ने मारुति को वरदान में कई दिव्य शक्तियां प्रदान की इसके साथ ही उन्होंने मारुति को वरदान दिया कि मारुति को उनके भक्त हनुमान नाम से पूछेंगे देवराज इंद्र ने भी हनुमान जी को यह वरदान दिया कि आज से मारुति मेरे वज्र द्वारा भी अभय रहेगा

परम पिता ब्रह्मा जी ने भी कहा हनुमान जी आज से तुम ब्रम्हांड में जितने भी शस्त्र है वह तुम्हे छू भी नहीं पाएंगे कोई भी हनुमान जी को पराजित नहीं कर पाएगा अपनी इच्छा अनुसार रूप धारण कर सकेंगे जहां चाहे वहां जा सकेंगे हनुमान जी की इच्छा अनुसार उनकी गति तीव्र और मंद हो जाएगी  कहा जाता है कि घटना के बाद ही मारुति का नाम हनुमान जी पड़ गया 

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