श्री जगन्नाथ मंदिर भारत के चार धामों में से एक है इस मंदिर में विराजमान है भगवान जगन्नाथ उनकी बहन सुभद्रा और बड़े भाई बलभद्र प्राचीन ताम्रपत्र से पता चलता है कि इस मंदिर का निर्माण 1078-1148 के बीच कलिंग राजा अनंतवर्मन छोड़ गंगाजल ने करवाया था बाद में सन 1197 में उड़िया के राजा अनंत भीमदेव ने इस मंदिर को नया रूप दिया जो आज भी हम देख सकते हैं

   प्राचीन काल से ही इस मंदिर पर कई राजाओं की आस्था रही है जिसकी वजह से के राजाओं ने कीमती आभूषण और रत्न इस मंदिर को भेट दिए थे ऐसे ही एक महाराजा रणजीत सिंह उन्होंने अमृतसर के श्री हरमिंदर साहिब को कई कीमती आभूषण और सोना दान दिया था लेकिन उससे भी ज्यादा दान और कई कीमती आभूषण उन्होंने भेंट किए थे श्री जगन्नाथ मंदिर को उनकी वसीयत के अनुसार जब प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भी इसी मंदिर को भेटदिया जाना था लेकिन ब्रिटिश साम्राज्य बीच में आया और वह हीरा ब्रिटिश चुरा कर अपने साथ ले गए सैकड़ों सालों से इस मंदिर को जो कीमती दान मिला है और सारे हीरे जवाहरात श्री जगन्नाथ जी के पैरों के नीचे रखे हुए हैं

   जगन्नाथ मंदिर में रखे गए इस खजाने की आखिरी बार 1978 में की गई थी और उस वक्त इस खजाने की गणना के लिए मुंबई और गुजरात से कई जवेरी को बुलाया था लेकिन इस खजाने में कुछ दुर्लभ और कीमती थे उनकी कीमत जवेरीभी नहीं लगा पाए थे 1978 के बाद यह कमरा खोला गया था 1985 में लेकिन इसकी गणना नहीं की गई थी पिछले 40 सालों से इस खजाने की गणना नहीं की गई है और पिछले 30 सालों से भंडार के दरवाजे बंद है

    4 अप्रैल 2018 हाईकोर्ट के इस मंदिर के खजाने की जांच की जाए तुरंत 16 मेंबर्स की टीम बनाई गई टीम में शामिल थे मंदिर के एडमिनिस्ट्रेटर प्रदीप कुमार जीना मंदिर के महाराज जिले के कुछ अधिकारी इंडिया के कुछ मेंबर और कुछ रत्न भंडार में नीचे पहुंची तो मंदिर प्रशासन के द्वारा उन्हें बताया गया कि रत्न भंडार की चाबी गुम हो गई है उसके बाद किस टीम ने बाहर से ही उस कमरे की जांच की और वापस लौट गई इस जांच के बाद प्रदीप कुमार जेना ने एक पत्रकार परिषद ली जिसमें उन्होंने बताया कि रत्न भंडार की जांच बाहर से कर ली गई है लेकिन उन्होंने चाबी गुम होने के बारे में क्या रखना भंडार के अंदर ना जाने की वजह बाहर पत्रकारों को नहीं बताई लेकिन उसी शाम मंदिर के कमेटी की एक बैठक बुलाई थी जिसमें गुम हुई चाबी ऊपर चर्चा हुई जिसमें असली चाबियां कहां और किसके पास है आखिर तक पता नहीं चला 

    इस बारे में बाहर मीडिया और नागरिकों को कुछ भी खबर नहीं थी लेकिन दो महीने बाद यह बात मीडिया में लीक हो गई और दुनिया के सामने भंडार की चाबी गुम हो जाने के बारे में पता चला इस घटना के बाद मंदिर की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो जाते हैं और आखिर क्यों चाबी गुम हो गई जिसमें भगवान जगन्नाथ पूरी का करोडो का खजाना रखा हे और चाबी के गुम होने की खबर मंदिर प्रशासन को पहले क्यों नहीं थी और अगर थी तो जाने से पहले ही उन्हें चाबी गुम हो जाने के बारे में क्यों नहीं बताया गया जब दशकों के बाद खोलने का मौका आया तो चाबी गुम गई या उनकी चोरी की गई 

    श्री जगन्नाथ मंदिर एक्ट 1960 के मुताबिक हर 6 महीने में रत्न भंडार को खोला जाना चाहिए और हर 3 साल बाद मंदिर की कमेटी चेंज होने पर रत्न भंडार की जांच की जानी चाहिए ऐसा कानून है लेकिन पिछले 40 सालों से इस खजाने की गिनती नहीं हुई है इसके पीछे की वजह मंदिर प्रशासन किसी को नहीं बता दी और ना ही सरकार उन पर कोई दबाव बना पाती है कुछ सालों पहले इस मंदिर से दो मूर्तियों की चोरी हुई थी जिसके बाद मंदिर के लिए 50 किलो का ताला तक बनवाया गया था कहा तो यह भी जाता है कि रत्न भंडार से कई कीमती आभूषण भी गायब है लेकिन मंदिर प्रशासन ने इस बात का साफ इनकार किया है 

  इस घटना के बारे में हमें जानना जरूरी था जो कि मंदिर में रखा खजाना भारत देश की संपत्ति है और हमारे देश की संपत्ति के बारे में जानने का अधिकार भारत के हर नागरिक को है यह बात अभी भी एक रहस्य है कि खजाने की असली चाबी आज कहां है जो कुछ भी हो लेकिन सरकार ने नियम के मुताबिक केएसएसआर ही मंदिरों के खजाने की नियमित जांच करनी चाहिए और हो सके तो इस खजाने का उपयोग नैसर्गिक आपदा के समय करना चाहिए 

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