शनि साढ़े साती या साढ़े साती एक व्यक्ति के जीवन में लगभग साडे सात साल की अवधि है,
जो निश्चित रूप से कठिनाइयों और चुनौतियों से जुड़ी है।

शनि ग्रह ने नवरात्रि के छठे दिन अपनी चाल बदल ली है। शनि पूरे 141 दिन बाद 11 अक्टूबर को मकर राशि में मार्गी हो गए हैं। ज्योतिष शास्त्र अनुसार जिस तरह से शनि के राशि परिवर्तन का प्रभाव पड़ता है उसी तरह से वक्री शनि के मार्गी होने का भी सभी राशियों पर असर देखने को मिलता है। लेकिन शनि की इस चाल से शनि साढ़े साती और शनि ढैय्या से पीड़ित राशियों के लोग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं ।

शनि मार्गी से मतलब है शनि की सीधी चाल। शनि 23 मई 2021 से अपनी वक्री चाल चलना शुरू किए थे जो 11 अक्टूबर से अपनी सीधी दिशा में वापस आ गए हैं। वैदिक ज्योतिष में शनि का मार्गी होना एक महत्वपूर्ण घटना मानी जाती है। जिन लोगों को शनि की वक्री स्थिति के दौरान दिक्कतों का सामना करना पड़ा था उन्हें शनि के मार्गी होने से कुछ राहत मिलेगी। शनि की सीधी चाल अमूमन शुभ फल लेकर आती है।

शनि को प्रस्सन करने के उपाय:

शनिवार के दिन साबुत उड़द दाल, तिल के बीज, लोहा, काले कपड़े आदि का दान करें।
किसी विद्वान से परामर्श लेकर नीलम रत्न धारण करें।
शनिवार के दिन शनि मंदिर जरूर जाएं और शनि देव की मूर्ति के समक्ष सरसों के तेल का दीपक जलाएं।
कहते हैं भगवान हनुमान और शिव जी की पूजा करने से भी शनि परेशान नहीं करते।
शनिवार के दिन शनि चालीसा और हनुमान चालीसा का पाठ करें।

शनि 29/04/2022 को राशि परिवर्तन करेंगे। इस दौरान शनि मकर राशि छोड़ कुंभ में प्रवेश कर जायेंगे। शनि के राशि बदलते ही धनु जातकों को शनि साढ़े साती से मुक्ति मिल जाएगी। वहीं मिथुन और तुला जातक शनि ढैय्या से मुक्त हो जायेंगे।

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