दोस्तों यदि कोई आप से पूछें कि सुखी जीवन जीने के लिए सबसे ज्यादा आवश्यक क्या है तो आप कहेंगे धन लेकिन आपने कभी विचार किया है कि समाज में कई ऐसे लोग भी हैं जो बहुत अधिक धनी नहीं है किंतु फिर भी बड़े ही आराम से अपना जीवन जीते हैं भला कैसे इसका जवाब बिल्कुल सीधा है दरअसल किसी भी मनुष्य को सुखी जीवन जीने के लिए धन की नहीं अपितु मान सम्मान की जरूरत होती है

कोई भी मनुष्य नहीं चाहता है कि समाज में उसका मजाक उड़ाया जाए पीठ पीछे लोग उसे भला बुरा कहे या 4 लोगों के सामने उसे कभी नीचा देखना पड़ा वैसे इसी बात को ध्यान में रखते हुए आज हम आपको गरुड़ पुराण में वर्णित पांच ऐसी महत्वपूर्ण बातें बताएंगे जिनका पालन करने पर आप कभी अपमानित नहीं होंगे तो चलिए शुरू करते हैं

  • जीवन को अच्छे ढंग से व्यतीत करने के लिए पैसा कमाना जरूरी है यदि आपके पास पैसा नहीं होगा तो आपके वे सारे कार्य अधूरे ही रह जाएंगे जो सिवाय धन के पूरे नहीं हो सकते हैं लेकिन क्या आपने कभी विचार किया है कि यदि आपके पास जरूरत से ज्यादा धन इकट्ठा हो जाए और तब भी आप उस धन को खर्च नहीं करते हैं या फिर उन अधूरे कार्यों को पूरा नहीं करते हैं जो धन की वजह से अब तक अधूरे थे तो आप समाज में एक कंजूस व्यक्ति के रूप में देखे जाएंगे जगहजगह लोग आपकी बातें करेंगे या आपकी हंसी उड़ाएंगे और तो और कई बार आपको अपमान का सामना भी करना पड़ेगा संभवत इसी वजह से दोस्तों गरुड़ पुराण आपको यह सलाह देता है कि जिस जगह आपको जितना खर्च करना है उतना तो जरूर कीजिएगा पैसा बचाना अच्छी बात है लेकिन हर जगह पैसा बचाना भी उचित नहीं है अब बात करते हैं 

 

  • दूसरे नियम की दोस्तों किसी भी मातापिता के लिए उत्तम बात यही है कि उनका पुत्र आज्ञाकारी हो उनकी हर बात माने तथा समाज में एक आदर्श व्यक्ति के धरा अपना जीवन यापन करें लेकिन दोस्तों सभी मातापिता इतने भाग्यशाली नहीं होते हैं संसार में ऐसे कई लोग हैं जिनके पुत्र आज्ञाकारी नहीं है यह बस अपनी मनमानी करते हैं जाति समाज मानसम्मान की कोई परवाह नहीं है लेकिन दोस्तों यह पता नहीं है कि ऐसा करने से समाज में ना सिर्फ इन्हें बल्कि इनके साथ इनके परिवार तथा कुटुंब को भी अपमानित होना पड़ता है और इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण हमें महाभारत में दुर्योधन के रूप में देखने को मिलता है जिस की मनमानी के आगे ना सिर्फ उस को बारबार अपमानित होना पड़ा उनका समूल नाश भी हो गया इसीलिए दोस्तों पुराण कहता है कि आज्ञाकारी संतान से बड़ा सुख दुनिया में कोई और हो ही नहीं सकता अतः आप अपनी संतान को बचपन से ही अच्छे संस्कार दीजिएगा 

 

  • अब बात करते हैं तीसरे नियम की असल में दोस्तों संसार में कई दुष्ट अर्थात बुरे चरित्र वाले लोग हैं इन लोगों के मन में भगवान का कोई भय नहीं है अथवा अहंकार के मद में चूर होकर यह दुष्ट बुरे से बुरे कृत्य को अंजाम देने में सोचते नहीं लेकिन दोस्तों आज हम यहां ऐसे लोगों की चर्चा नहीं कर रहे हैं बल्कि आज हम उन लोगों की चर्चा करना चाहते हैं जो ऐसे दुष्टों लोगों से मित्रता रखते हैं अथवा उनका साथ देते हैं जबकि इन्हें यह करना चाहिए कि मित्रता सिर्फ अच्छे लोगों से ही रखें दुष्ट लोगों से मैत्री रखने पर यह भी दुष्ट कहलाएंगे और दोस्तों को यदि कभी संकट आएगा तो ऐसे में सबसे पहले यह इन्ही मित्रों की बली चढ़ाएंगे जो इनके हितेषी बने घूमते हैं संभवत इसी बात को ध्यान में रखते हुए गरुड़ पुराण हमें यह संदेश देता है हमें कभी भी दुष्ट लोगों से मित्रता नहीं रखना चाहिए किंतु फिर भी यदि कोई ऐसा करता है तो एक एक दिन उसे अपमानित होना ही पड़ेगा 

 

  • अब बात करते हैं चौथे नियम कि इसके अनुसार कई लोगों में दूसरों को अपमानित करने अथवा उन्हें नीचा दिखाने की भावना अत्यंत ही प्रबल होती है ऐसे लोग अन्य लोगों को अपने से तुच्छ समझते हैं और सदा ही दूसरों के अहित करने की कामना करते रहते हैं बस इनका जीवन यही सब करते बीत जाता है और एक दिन यह स्वर्गवासी हो जाते हैं लेकिन इन्हें यह पता नहीं है कि इनके बाद उनके वंशजों को अपमानित होना पड़ेगा लोग इनकी आस्वाद अथवा बंधु बांधव को बुरा कहने से नहीं चूके हैं अतः दोस्तों ऐसे लोगों के संदर्भ में गरुड़ पुराण कहता है कि किसी भी मनुष्य को जितना हो सके सत्कर्म करने चाहिए ज्यादा से ज्यादा दुखियों की मदद और समाज कीभलाई हेतु प्रयास करते ही रहना चाहिए ताकि आपके जाने के बाद भी लोग आपके सब कर्मों को याद कर सके और उससे भी बड़ी बात की सबसे आपकी आने वाली पीढ़ी को आपकी वजह से कोई ऐसी बात नहीं सुननी पड़ेगी जिससे उन्हें शर्मिंदगी हो 

 

  • अब बात करते हैं पांचवें नियम की असल में दोस्तों कई लोग आर्थिक रूप से बहुत अधिक संपन्न नहीं होते हैं इन्हें अपना संपूर्ण जीवन तंगहाली में बिताना पड़ता है यह थोड़ा कम खाते हैं और थोड़े में ही संतुष्ट रहते हैं इनके कोई भी काम रुकते नहीं है किंतु इसके ठीक विपरीत कुछ लोग ऐसे भी हैं जो दरिद्र होकर भी दाता बने घूमते हैं कहने का अर्थ यह है कि यह लोग कमाते तो बहुत थोड़ा है लेकिन फिर भी दूसरों को दिखाने के चक्कर में पड़कर अपनी हैसियत से अधिक खर्च कर देते हैं इसके कारण इन्हें तथा उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ता है और तो और कई बार इन्हें अपनी आदत के कारण 4 लोगों के सामने अपमानित भी होना पड़ता है अतः इसे लोगों के संदर्भ में गरुड़ पुराण कहता है कि दान देने अर्थात खर्च करने से पहले अपनी आर्थिक स्थिति जरूर देख लेना चाहिए अन्यथा आगे चलकर पछताना पड़ेगा

 तो दोस्तों यह थे गरुड़ पुराण के 5 नियम का पालन संसार के प्रत्येक मनुष्य को पूरी निष्ठा के साथ करना चाहिए ताकि किसी भी दशा में अपमानित होने से बचा जा सके आशा करते हैं आपको यह जानकारी जरूर अच्छी लगी होगी 

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