नमस्कार आज हम बात करने वाले हे महाभारत में बताये गए वह १० स्थान जो आज कहा पर हे और क्या खास बात हे उन जगह की 

  • सबसे पहले नंबर पर आता है उज्जनक मंदिर नैनीताल जिले में स्थित उज्जैन वह स्थान है जो कुरु वंश के बच्चों ने अपने शिक्षक द्रोणाचार्य के मार्गदर्शन में तीरंदाजी की कला में महारत हासिल की इस स्थान पर पाए जाने वाला भीमाशंकर मंदिर ज्योतिर्लिंगों में से एक है ऐसा कहा जाता है कि भगवान शिव के प्रतीक को भीम ने अपनी शिक्षक गुरु द्रोण के निर्देश पर स्थापित किया था 
  • दूसरे स्थान पर आता है बाणगंगा वह स्थान क्षेत्र से भीष्म पितामह ने अपनी प्यास बुझाई थी यह स्थान कुरुक्षेत्र से कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित है वह स्थान जहां भीष्म पितामह बाणों की शैया पर लेटे थे पानी मांगे जाने पर अर्जुन ने जमीन पर तीर चलाया और गंगा की एक धारा बाहर निकाल दी सीधे भीष्मपितामह के मुंह में जा गिरी 

  • तीसरे स्थान पर आता है कुरुक्षेत्र जहां महाभारत की लड़ाई लड़ी गई थी हरियाणा राज्य के अंबाला शहर में स्थित वह स्थान है जहां महाभारत का युद्ध लगातार 18 दिनों तक चला था जिसमें सभी लोग स्तंभ रह गए थे यह स्थान उन नायकों के बारे में बोलता है जिन्हें धर्म के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया ऐसा कहा जाता है कि ब्रह्मा ने एक बार यहां एक अनुष्ठान किया था और इसीलिए एक तालाब जिसे ब्रह्म सरोवर कहा जाता है भक्त सूर्यग्रहण के दौरान पवित्र स्नान करने के लिए इस तालाब में आते हैं

  • हस्तिनापुर जो कि उत्तर प्रदेश राज्य के मेरठ शहर में स्थित कुरु वंश की राजधानी थी यह कौरवों और पांडवों की राजधानी भी थी यह वह जगह है जहां द्रोपदी ने यहां धन खोया और युधिष्ठिर ने जुआ खेलने के खेल में अपने भाइयों को खो दिया महाभारत का युद्ध जीतने के बाद पांडवों ने इस शहर को अपनी राजधानी बनाया एक ऐसा स्थान जिसने गौरवशाली समय बनाया है और दुराचार के लिए शोक भी व्यक्त किया है एक स्थान जो महाभारत युद्ध के बाद एक बार फिर से पांडवों की भव्य राजधानी बन गया हस्तिनापुर भारत के प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक रहा है

  • पांचवें स्थान पर आता है वरनावत जो कि मॉम वास्तुकला की अवधारणा है खैर हम इन दिनों बहुत सारे मोम के संग्रहालय देखने को मिलते हैं लेकिन यह जाना आश्चर्यजनक नहीं है कि इस अवधारणा का उपयोग बहुत पहले किया गया था हां गंगा नदी के तट पर स्थित यह उत्तर प्रदेश में मेरठ के पास स्थित एक शहर है यहीं पर दुर्योधन ने पांडवों को मारने के लिए एक लक्ष्य करीब जो कि मॉम का घर का निर्माण किया था महाभारत के युद्ध से बचने के लिए पांडवों ने कौरवों से 5 गांव के लिए कहा था इन 5 शहरों में से एक है जो कोई यात्री और पर्यटक द्वारा दौरा किया जाता है आपको अपनी यात्रा के दौरान इस स्थान पर कुंती की मूर्ति देखने को भी जरूर मिलेगी
  •  छठे स्थान पर आता है पंचाल सुंदर द्रोपति का स्थान पंचाल प्रदेश हिमालय और गंगा नदी के दोनों और चंबा नदी के बीच स्थित था एक बार जब पंचाल के राजा को अयोध्या के राजा से हमले की खबर मिली तो उन्होंने कहा कि उनके 5 पुत्र ही युद्ध लड़ने के लिए पर्याप्त थे तब से इसे पंचाल कहा जाता है द्रोपदी राजा द्रुपद की बेटी थी और उसका नाम पंचाली था क्योंकि वह पंचाल की राजकुमारी थी वह दो परिवारों को विभाजित करने के लिए ही पैदा हुई थी और वह पांच पांडव भाइयों की एकता को बनाए रखने के लिए पैदा हुई थी 
  • सातवें स्थान पर आता है इंद्रप्रस्थ यह स्थान नई दिल्ली में स्थित है आज की राजधानी पांडवों की राजधानी भी थी कहा जाता है कि पांडवों द्वारा खंडप्रस्थ जंगलों को नष्ट कर दिया गया था जिस पर इंद्रप्रस्थ गर्व से खड़ा था विश्वकर्मा भक्तों के वास्तुकार ने इस शहर को डिजाइन किया था यह शहर पांडवों की राजधानी थी ऐसा कहा जाता है कि इंद्रप्रस्थ की भूमि आज दिल्ली का पुराना किला है

  • आठवें स्थान पर आता है अंगदेश जिसे उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में मालिनी नगरी के रूप में भी जाना जाता है करण ने अपने मित्र दुर्योधन द्वारा शासन किया था दुर्योधन को यह राज्य जरासंध से उपहार के रूप में मिला था यह स्थान शक्तिपीठों में से एक है जो पुराणों के अनुसार है सती का दाहिना हाथ विष्णु के चक्र से कट जाने के बाद यहां गिर गया था और यहां खैरा भवानी नाम का एक मंदिर देवी पार्वती को समर्पित है और भारत के प्रसिद्ध तीर्थ स्थानों में से एक रहा है 

  • नौवें स्थान पर आता है गंधार यह महाभारत का एक प्राचीन शहर था और वर्तमान में सिंध प्रदेश रावलपिंडी में सिंधु नदी के पश्चिम में स्थित है द्रुतराष्ट्र की पत्नी गंधारी गंधार के राजा की बेटी थी गांधार का भाई शकुनी महाभारत के युद्ध के कारणों में से एक था 

  • दसवें और आखरी नंबर पर आता है द्वारका नगरी यह गुजरात के पश्चिमी तट पर स्थित है और महाभारत काल का एक प्राचीन शहर है जरा संघ के हमलों से यादवों की रक्षा के लिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी राजधानी मथुरा से द्वारका संस्थारन कर दी थी समुद्री आरकेलार्जेस्ट ने गुजरात के तट पर द्वारका के डूबे हुए अवशेष पाए हैं जो कुछ हजार साल पुराना होने का अनुमान लगाया है 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *