आज हम बात करेंगे एक ऐसी जेल की जिसमें सिर्फ एक कैदी रहता है और उस कैदी की देखभाल करने के लिए 5 सिपाही और एक जेलर तैनात रहता है दुनिया रहस्य से भरी हुई है जिधर भी नजरें इनायत करो कुछ न कुछ अद्भुत और रोचक नजर आ ही जाता है और अगर भारत में अपना सिर घुमा कर देखेंगे तो आपको कुछ न कुछ अचंभित करने वाला मिल ही जाएगा

 

भारत के गुजरात राज्य की तरफ एक छोर पर देखेंगे तो ऐसा कुछ दिलचस्प नजारा दिखेगा जिसे देखने के बाद आप कंफ्यूज भी हो सकते हैं समुद्र किनारे एक आलीशान बिल्डिंग नजर आएगी जो किसी महल की तरह प्रतीत होती है लेकिन आप जानकर हैरान हो जाएंगे की है कोई महल नहीं बल्कि एक जेल है यह बात हो रही है दिव् की जो केंद्र शासित प्रदेश के रूप में जाने जाने वाले दीव की जेल की भव्यता देखकर आश्चर्यचकित हो जाएंगे किसी जमाने में यह जगह पुर्तगाल की कॉलोनी के भीतर आती थी करीब 475 साल पुरानी जेल में सिर्फ और सिर्फ एक ही कैदी रहता है जी हां इस जेल में सिर्फ एक ही कैदी रहता है

यह बात और भी हैरान करने वाली है कैदी का नाम दीपक कांजी है और उसकी उम्र 30 साल है दीपक कांजी पर आरोप है कि उसने अपनी पत्नी की जहर देकर हत्या कर दी थी जेल में दीपक  सिर्फ अकेले रहते हैं २० लोगो के बराक में अकेले रहते हे जिसमे टीवी ब्लैंकेट वाटर कंटेनर भी हे उनकी सुरक्षा में 5 सिपाही और जेलर की तैनाती की गई है सभी की शिफ्ट घंटों के हिसाब से तय की गई है 2013 में ही इस जेल को बंद करने की घोषणा कर दी गई थी और इस जेल को टूरिस्ट डिपार्टमेंट को सोप देना था तब से दीपक की वजह से यह जेल सोपा नहीं जा सक कुछ सालों पहले यहां और केदि हुआ करते थे जिनमें दो महिलाएं और बाकी पुरुष शामिल थे लेकिन किन्हीं कारणों से उनमें से चार का स्थानांतरण गुजरात के अमरेली जेल में कर दिया गया वहीं दो कैदी की सजा की अवधि पूरी हो चुकी थी लिहाजा उन्हें रिहा कर दिया गया

इसलिए अब सिर्फ एक ही रह गया है जेल में ड्यूटी पर तैनात सिपाही ने मीडिया से बात करते हुए बताया कि एक कैदी के लिए समय बिताना बहुत मुश्किल हो जाता है आंकड़ों के मुताबिक दमन और दीव में प्रत्येक पर सरकार को ₹32000 महीना खर्च आता है जबकि अन्य राज्यों के मुकाबले बहुत ज्यादा है जिस बैरक में दीपक रहा करता है इसकी जगह है उसके लिए खाने का बंदोबस्त पड़ोस के रेस्टोरेंट्स जाता है उसे जेल में कुछ समय के लिए दूरदर्शन अन्य आध्यात्मिक चैनल देखने की अनुमति है उसे जेल के भीतर गुजराती अखबार और मेडिसिन दी जाती है शाम 4:00 से 6:00 तक के बीच वह दो सिपाहियों के साथ खुली हवा में टहल भी सकता है

 

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