चिरंजीवी है अश्वत्थामा महाभारत के योद्धा जो आज भी जिंदा है और उन्हें देखे जाने की खबरें आज तक आती रहती हैं आप सब ने अश्वत्थामा के अस्तित्व की कई बाते सुनी होगी लेकिन आज हम आपको दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में अश्वत्थामा से जुड़ी इतिहास की पूरी जानकारी देने वाले हैं तो गुरु द्रोणाचार्य के पुत्र अश्वत्थामा जिनका जन्म महाभारत काल में हुआ था अश्वत्थामा को जन्म से ही माथे पर मणि मिली थी जो उन्हें भूख और अस्त्रों से सुरक्षा देती थी क्योंकि वह अमर थी वह किसी बीमारी को भी महसूस नहीं कर सकते थे

महाभारत में युद्ध नियमों के विपरीत उन्होंने पांडवों के शिविर पर रात के वक्त हमला कर दिया उन्होंने ब्रह्मास्त्र से गर्भवती उत्तरा को मारना चाहा इसी कारण श्री कृष्ण ने सुदर्शन चक्र से अश्वत्थामा की माथे की मणि को उतार दिया श्री कृष्ण ने अश्वत्थामा को श्राप दिया कि वो कलयुग के अंत तक माथे की इस जख्म के साथ देंगे उसका शरीर त्वचा रोगों से भर जाएगा कोई उसे खाना नहीं देगा और कोई उसके जख्म ठीक नहीं कर पाएगा कहते हैं तब से अश्वत्थामा ऐसे ही जंगलों में भटक रहा है लेकिन हमारे मन में एक सवाल आता है कि अगर गीत सच है तो हमें अश्वत्थामा की अस्तित्व की निशानियां क्यों नहीं मिलती

इसके लिए हमें इतिहास के पन्नों को खंगालना होगा रोमन माइथोलॉजी  में लगभग 3000 साल पहले यूनान की राजधानी में एक एशियाई बूढ़े गुरु का ज़िकर मिलता है  इस गुरु ने रोमन को कई एडवांस वेपन टेक्निक सिखाई वह कोई बूढ़ादेव तथा ठुकराया गया था वह खुद अमर था जिसने 200 साल तक वहां निवास किया सबसे हैरानी की बात की उस को शस्त्र विद्या थी अमर था लेकिन वह कभी लड़ने की हालत में नहीं था क्योंकि उसकी शारीरिक क्षमता बेहद कमजोर थी मैं यह नहीं कह रहा कि वह अश्वत्थामा ही थे लेकिन उस में समानता को शायद आप ही नकार नहीं सकते

लगभग 2200 साल पहले चीन के पहले शासक की मांग जो चीन के सबसे बड़े शासक माने जाते हैं पूरे जीवन काल में युद्ध लड़ते रहे उन्हें कभी मरने से डर नहीं लगता था लेकिन बुढ़ापे की शुरुआत में अमर होने का भूत सवार हो गया कहा जाता है तिब्बत जीतने के बाद उन्होंने हिमालय की यात्रा की जहां पर उनको एक अमर व्यक्ति मिला जो हजारों सालों से जीवित था उससे मिलने के बाद ही मांगने खुद अमर होना चाहा इस अमर ज्ञान को पाने के लिए उसने कई लोगों को बार-बार यहां भेजा लेकिन दोबारा वह व्यक्ति नहीं मिला उसे बस इतना पता था कि एक अमर करने वाला पानी ऐसा कर सकता है गलत जानकारी पाकर मांगने ज्यादा मात्रा में पारा पी लिया और उसकी मौत हो गई इसी तरह के कई किस्से दुनिया की अलग-अलग सभ्यता में मिलते हैं जिसमें अमर होने का श्राप जी रहे एक व्यक्ति के बारे में बताया जाता है

ऐसी ही घटनाएं भारत में भी बताई जाती हैं कई साल पहले मध्य प्रदेश के एक डॉक्टर ने भी दावा किया था उसके पास एक पेशेंट आया जो बेहद जख्मी था लेकिन बड़े हैरानी की बात कोई भी दवा उसके ठीक नहीं कर पा रही थी उसके सर की चोट बेहद गहरी थी जब डॉक्टर ने उससे पूछा कि क्या तुम अश्वत्थामा हो तो वह गायब हो गया किसी ने उसे बाहर जाती नहीं देखा

पायलट बाबा जो भारतीय वायुसेना में पायलट रह है चुके हैं वह भी बताते हैं हिमालय में वो अश्वत्थामा से मिल चुके हैं जो स्थानीय कबीले के साथ रहते हैं ऐसा ही कुछ मध्यप्रदेश के असीरगढ़ किले के बारे में भी बताया जाता है कि यहां पर अश्वत्थामा स्वयं आते हैं इसमें बने शिव मंदिर में हर रोज सुबह  है वह आकर पूजा करके जाते हैं इसके प्रमाण इस शिव मंदिर में हर रोज देखने को मिल जाते हैं

ऐसी ही एक मूवी 2007 में आ चुकी है जिसका नाम था themanfromearth इसमें भी एक ऐसी आदमी की कहानी है जो हजारों सालों से जिंदा है इसे भी हम अश्वत्थामा से प्रेरित  मूवी कह सकते हैं इसी तरह की घटनाओं और कहानियों में हम अश्वत्थामा के अस्तित्व को जान सकते हैं