महाभारत काल की वो तकनीक जिसे हमारे ग्रंथों में बताया गया है दिव्य शक्ति और अकल्पनीय ज्ञान और प्रलयंकारी अस्त्र भले ही हम में से ज्यादा इसमें भी तर्क ढूंढने लगते हैं लेकिन दुनिया के कई हिस्सों में ऐसी चीजें मिल चुकी है जो प्राचीन काल में भी ऐसे ज्ञान के होने की तरफ इशारा करती हैं शायद यही कारण है कि आज भी कई वैज्ञानिक इन प्राचीन अस्त्रों से प्रेरित होकर आज के हथियार बना रहे हैं तो आइए जानते हैं कि किन अस्त्रों जैसे हथियार बनाने की कोशिश हो रही है

सुदर्शन चक्र महाभारत काल का सबसे शक्तिशाली अस्त्र शस्त्र का इस्तेमाल श्री कृष्ण ने किया था जो एक डिस्क के आकार का हथियार था जो छोड़े जाने के बाद दुश्मन को मार कर छोड़ी गई जगह पर वापस जाता था इससे कोई भी बच नहीं पाता था और इसे बारबार इस्तेमाल किया जा सकता था आज वैज्ञानिक एक ऐसा हथियार बनाने में लगी है जो टारगेट को डिस्ट्रॉय करने के बाद छोड़ी गई जगह पर वापस जाए अब तक हम सिंगल यूजर मिसेस का इस्तेमाल करते हैं लेकिन अमेरिकन सेक्स एक्स एक ऐसा रॉकेट बना चुकी है जो स्पेस में जाकर वापस सकता है इसे दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन आप सोच रहे होंगे कि अगर मिसाइल टारगेट कर गई तो वापस कैसे सकती है दरअसल mirv  जिसमें कई छोटी मिसाइल होती है जो मल्टीपल टारगेट हिट कर सकती हैं इसके ही कैरियर मिसाइल को बार बार इस्तेमाल करने पर काम चल रहा है लेकिन सुदर्शन चक्र के जैसे डिस्क आकार पर काम नहीं हो रहा है शायद इस कॉम्पैक्ट डिज़ाइन तक पहुंचने में बहोत समय लगने वाला है 

नारायणास्त्र यह एक ऐसा अस्त्र था जिसे रोका नहीं जा सकता था इस अस्त्र में  से कई तरह के अस्त्र निकलते जो विरोधी का अंत करती थी इसका जितना विरोध किया जाता इसका प्रहार उतना प्रचंड होता इसको रोकने के लिए आत्मसमर्पण करना पड़ता महाभारत में भी इसका इस्तेमाल किया गया था आज वैज्ञानिक कोई ऐसा विमान या रॉकेट नहीं बना पाए हैं जो इतनी ज्यादा मिसाइल कैर्री कर सके लेकिन भविष्य के लिए प्रोजेक्ट पर काम चल रहा है एक न्यूक्लियर पावर से ज्यादा मात्रा में अटैक किया जा सकता है जिस कारण इसका बार कभी नहीं रुकेगा

वैष्णव अस्त्र यह ऐसा अस्त्र था जो बहुत ही तेजी के साथ था इसे महाभारत काल का सबसे ज्यादा तेज था इसका वर्णन किया गया है इसे विरोधी की तरफ छोड़ने की बजाय ऊपर की तरफ छोड़ना पड़ता था इसके बाद यह बहुत तेजी के साथ ऊपर से वार करता यह भयंकर आग बरसाता आज दुनिया की सबसे तेज मिसाइल brahmos  को माना जाता है जो एक क्रूज मिसाइल है जो सरफेस के पास से टारगेट करती है 

एक ऐसा अस्त्र जिसे शायद हम बना चुके हैं वह है ब्रम्हास्त्र यह अस्त्र थाा जो उस जगह की हर जीवजंतु पेड़पौधे को राख बना देता था इससे निकलने वाली रोशनी सूर्य से भी हजारों गुना तेज थी  विनाश के बाद भी वो जगह जहरीली हो जाती और कई साल वहां बारिश नहीं होती ना वहां पर पेड़ लगता दोबारा कोई रह सकता इसमें और परमाणु बम में पूरी तरह से समानता हे जिसकी रोशनी सूर्य से हजारों गुना तेज  होती है यह भी वहां की हर वस्तु को राख बना देता है और इसकी रेडिएशन कई साल वह जगह रहने लायक नहीं छोड़ती

लेकिन क्या आप इसे एक संयोग कहेंगे कि न्यूक्लियर बम के जनक रॉबर्ट ओपेनहाइमर भागवत गीता को हमेशा अपने साथ रखते थे 1933 में उन्होंने संस्कृति सीखी थी इसी प्रेरणा के साथ उन्होंने एटम बम बनाया था इसे बनाकर उनके शब्द श्रीमद भगवत गीता के श्लोक थे जिसका अर्थ है अब मैं मौत बन गया हूं दुनिया का अंत करने वाला जिस तरह से यह हथियार बनाए जा रहे हैं शायद भविष्य में हम इन्हें देख भी पाए लेकिन सोचने वाली बात अगर इतिहास में ही बनाई जा चुकी थी तो यह तकनीक कहां लुप्त हो गई अगर इसी छिपाया गया तो क्या हम इसे दोबारा बना कर विनाश का कारक बनेंगे 

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