हठयोगी का नाम सुनकर हमारे मन में एक ही छवि उभर कर आती है एक ऐसा योगी जो भौतिक सुखों को त्याग कर सालों तक शारीरिक कष्टों को सह कर भक्ति में लीन रहते हैं हमारे ग्रंथों में ऐसे ही हठयोगी ऋषि यों की गई कथाएं बताई गई हैं जो अलग-अलग युगों में गहन साधना करके अलग-अलग तरह के ज्ञान प्राप्त कर चुके थे उनके पास वह अलौकिक ज्ञान था जो आज शायद बहुत ही कम लोग जानते हैं 

आपके मन में जरूर यह ख्याल आता ही होगा कि काश आप भी ऐसे ही किसी योगी से मिल पाते उनसे आशीर्वाद ग्रहण कर पाते तो आज हम आपके लिए ऐसे ही एक हठयोगी की जानकारी लेकर आए हैं जो पिछले 22 सालों से ऐसा ही हट क्यों कर रहा है खुले आसमान के नीचे बैठा यह हठयोगी आपको आशीर्वाद तो दे सकता है लेकिन आप उसके मुख से एक भी शब्द सुन नहीं सकते

मुख्यमंत्री आशीर्वाद लेते हुए

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में देवरी डूमरपाली गांव से है यह महान योगी 12 जुलाई 1984 को जन्मे हलधर बचपन से ही उनका स्वभाव बाकी सब बच्चों से अलग था जिस उम्र में बच्चे दूसरों को देखकर सीखते हैं यह बताया करते थे कि उनको स्वप्न में भगवान शिव दर्शन देती हैं इसी कारण उनके परिवार वाले उन्हें सत्यम कहकर पुकारते थे उनके साथी बच्चे जब शरारत किया करते थे उस उम्र में सत्यम एक बार 7 दिन के लिए ध्यान लगा कर बैठ गए 7 दिन तक उन्हें ना भूख प्यास लगी और ना ही कोई सुधि ऐसा तब देखकर परिवार वाले  सत्यनारायण कहने लगे 

वह भगवान शिव को ही अपना माना करते थे 16 फरवरी 1998 को वह आम दिनों की तरह स्कूल के लिए निकले लेकिन स्कूल ना जाकर ईश्वर निर्धारित स्थान पर जाकर तप करने लगे अपने पैतृक गांव से 18 किलोमीटर दूर कोसमनारा गांव के उजाड़ में उन्होंने अपनी तपोस्थली बनाई उसी दिन उन्होंने एक पत्थर को शिवलिंग मानकर अपनी जीभ अर्पण कर दी और तप में लीन हो गए 1 सप्ताह बाद उनके एक सेवक ने बगल में अग्नि प्रज्वलित कर दी यही अग्नि अखंड भूमि के नाम से हमेशा जलती रहती है शुरू में तो उनकी तपस्या को आम लोगों द्वारा स्वीकार नहीं किया गया और कई लोगों द्वारा बाबा जी को परेशान भी किया गया

स्वस्थ मंत्री आशीर्वाद लेते हुए

 लेकिन हठयोग का ही उसे जाता है जो योग मुद्रा में भौतिक चीजों के अभाव से बाहर चला जाता है तब से बाबाजी खुले आसमान में सुबह से लेकर रात 12:00 बजे तक तप करते रहते हैं भले ही आंधी आए बारिश आएगी या ठंड का प्रकोप हो बाबा जी इसी मुद्रा में इसी स्थान पर तप करते ही रहते हैं बाबा जी अपने भक्तों से भी सुबह 6:00 से 7:00 और रात को 12:00 से 3:00 के बीच ही मिलते हैं तब भी बाबा जी सिर्फ इशारों में ही बात करते हैं 

बाबा की ख्याति सुनकर कामाख्या की 108 मोनी कालाहारी बाबा भी यहां आए वही बाबा की तपस्या से बहुत ही प्रभावित हुए और 108 सत्य चंडी महायज्ञ किया गया इसी के बाद से बाबा सत्यनारायण को 108 की उपाधि देकर वह अपने धाम वापस चले गए तब से प्रतिवर्ष उनके अनुयाई यहां कोसमनारा दे हैं इस तरह इस जगह की ख्याति बढ़ती ही चली गई 

सबसे पहले यहां कुटिया का निर्माण हुआ लेकिन धीरे-धीरे यहां पर निर्माण होता जा रहा है बाबा सत्यनारायण की ख्याति इसी कारण बढ़ रही है क्योंकि बाकी बाबाओं की तरह हो भक्तों से बात नहीं करती बल्कि इशारों में आशीर्वाद ही देते हैं और सारा समय बस तपस्या करते रहते हैं अगर आप कभी छत्तीसगढ़ जाएं तो कोसमनारा जाकर इस हठयोगी का तब स्वयं देख सकते हैं और उनसे आशीर्वाद ले सकते हैं आप उनसे यह कठिन सवाल भी कर सकते हैं कि भौतिक सुख त्याग वह क्यों कठोर तप में लीन रहते हैं 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *