हिन्दू धर्म में भक्तिभाव वाले अनेक किरदारों का वर्णन है उन सभी में से हनुमान जी का किरदार सबसे दुर्लभ है हनुमान जी अति शक्तिशाली होते हुए भी कितने विनम्र और भक्ति भाव से परिपूर्ण थे हनुमान जी को भगवान शिव जी का अवतार माना जाता है कथाओं के अनुसार शिवजी के 28 अवतारों में से 11वां अवतार सबसे बलवान और बुद्धिमान समझा जाता है

माता अंजनी ने भगवान शिव जी की घोर तपस्या की थी और उनसे ऐसा पुत्र मांगा था जो उनका ही एक अंश हो तब पुराणों के अनुसार भगवान शिव ने पवन देव के रूप में अपनी रूद्र शक्ति का एक अंश अंजनी के यज्ञ कुंड में अर्पित किया वह शक्ति अग्नि कुंड से निकलकर माता अंजनी के गर्भ में प्रविष्ट हो गई तब चैत्र शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा को शिव जी के इस रूद्र अवतार का जन्म हुआ 

राम भक्त हनुमान अत्यंत शक्तिशाली है इसीलिए उन्हें महाबली की श्रेणी में रखा जाता है जैसा हमने आपको बताया था कि शिव जी ने पवन देव के रूप में अपनी शक्ति हनुमानजी को प्रदान की थी इस प्रकार उन्हें पवन की समस्त शक्तियां प्राप्त थी पवन जब अपने रौद्र रूप में आती है तो अत्यंत शक्तिशाली होती है हनुमान जी इतने ज्यादा वेगवान थे कि अन्य कोई उनसे तुलना के योग्य नहीं समझा जाता किस तरह हनुमान जी द्रोणाचल पर्वत को उठा कर क्षण भर में लंका ले गए थे और उपयोग के बाद रात भर में उसे यथा स्थान स्थापित कराए थे

हनुमान जी की संपूर्ण शक्ति को जानने के लिए आपको उनके पंचमुखी रूप को ठीक से जानना होगा पुराणों के हिसाब से हनुमानजी के 3 रूप हैं एक मुखी पंचमुखी और 11 मुखी और हनुमान जी की पंचमुखी रूप का वर्णन श्री विद्यारण्य तंत्र में है यह पुस्तक संस्कृत भाषा में है इसका हिंदी रूपांतरण हम आपको बता रहे हैं अपने विराट रूप में हनुमान जी के पांच मुख 15 नेत्र और 10 भुजाएं हैं इन 10 भुजाओं में 10 आयुध है खड़क त्रिशूल खटवांग पाश पर्वत अंकुश स्तंभ मुष्टि  गदा और वृक्ष की डाली शामिल है हनुमान जी की पंचमुखी रूप में चार मुख्य चारों दिशाओं की ओर और एक मुख ऊपर आकाश की ओर है 

पूर्व दिशा की ओर मुख वानर का है यह विकराल रूप है जिसकी लंबी दाढ़ी है पश्चिम दिशा की ओर मुख गरुड भगवान का है यह रूप नागों के बीच और भूत प्रेत को भगाने वाला है उत्तर दिशा की ओर वाला मुख वराह अवतार का है इसका वर्ण आकाश के समान कृष्ण वर्ण है पश्चिम दिशा की ओर मुख नरसिंह भगवान का है यह भी अत्यंत भयानक और डरा देने वाला रूप है किंतु निर्मल भाव और शांत मन से जो भी इस को देखता है उसे जरा भी डर नहीं लगता और अंतिम मुख पर आकाश की ओर है वह है घोड़े का यह भी एक भयानक रूप है इस मुख के द्वारा हनुमान जी ने तारक नामक दैत्य का वध किया था

पंचमुखी हनुमान जी में भगवान के 5 अवतारों के समय हुई है रामायण में जब रावण हारने  लगा था तब उसने पाताल लोक अहिरावण को बुलाया जो माता भवानी का एक परम भक्त था वह अत्यंत मायावी और तंत्र मंत्र का ज्ञाता भी था उसने अपने माया के दम पर श्री राम जी की सेना को निद्रा में डाल दिया था तथा राम और लक्ष्मण को पाताल लोक ले गए थे 

जब सब होश में आए तब विभीषण ने हनुमान को बताया कि ऐसी माया सिर्फ अहिरावण ही उत्पन्न कर सकता है अहिरावण माया उत्पन्न करने में रावण से भी कई गुना ज्यादा ताकतवर है उसकी शक्ति भी रावण की तरह रची गई माया से ही नियंत्रित होती है जिसे सीधे युद्ध में हराया नहीं जा सकता उसने श्री राम जी की सहायता के लिए हनुमान जी को पाताल लोक जाने को कहा पाताल लोक में अहिरावण ने मां भवानी के पांच दीपक जलाए हुए थे जो अलगअलग दिशाओं में थे विभीषण ने बता दिया था कि उन दीपक के एक साथ बुझने से अहिरावण की मायावी शक्ति क्षीण होने लगेगी तब हनुमान जी ने पंचमुखी रूप धारण किया था और एक साथ सभी दीपक बुझा कर अहिरावण का वध करके श्री राम और लक्ष्मण जी को लेकर आए थे 

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