हिन्दू धर्म में हमारे अनेक जन्मों का वर्णन किया गया है हम अपने जीवन काल में जैसा कर्म करते हैं हमें वैसा ही फल भी मिलता है और पिछले जन्म में की गई गलतियों का बोज हमें अगले जन्म में धोना ही पड़ता है लेकिन आखिर हमें पिछले जन्म का कुछ भी याद क्यों नहीं रहता अगर हमें पिछले जन्म के कर्मों का फल इसी जन्म में मिलता है तो हमें उसकी याद क्यों नहीं मिलती और क्या हम पिछले जन्म की यादों को ताजा कर सकते हैं

विश्व के सबसे प्राचीन ग्रंथ ऋग्वेद से लेकर दर्शन शास्त्र पुराण भागवत गीता योग आदि ग्रंथों में पुनर्जन्म का उल्लेख किया गया है इन सब के अनुसार शरीर की मृत्यु की जीवन का अंत नहीं है परंतु जन्म जन्मांतर की श्रंखला है 8400000 योनियों में जीवात्मा अपने धर्म को प्रदर्शित करती है और इसी श्रंखला में आत्मज्ञान होने के बाद यह श्रंखला रूकती है फिर भी आत्मा स्वयं के निर्णय लोक सेवा के लिए जन्म धारण करती है 

श्रीमद भगवत गीता में श्रीकृष्ण ने कहा है कि हे अर्जुन तेरे और मेरे कई जन्म हो चुके हैं मैं सब जानता हूं किंतु तू नहीं जानता मैंने इसकी जानकारी सबसे पहले विवस्वान को दी उन्होंने इसे मनुष्य के जन्मदाता मनु को बताया मनु ने इस ज्ञान को राजा इक्ष्वाकु को दिया जिसके बाद यह ज्ञान चल रहा है लेकिन हमें अपने पिछले जन का ज्ञान क्यों नहीं रहता इसकी जानकारी हमें अपनी पुराणों के अध्ययन से मिल सकती है 

हमारी कर्म कुछ और नहीं बल्कि सृष्टि संचालन के हमारे द्वारा निभाए गए किरदार की कार्य होते हैं अच्छे नियमों से जीवन को आगे बढ़ाना अच्छा होता है इसकी यादें हमारे व्यक्तित्व पर चर्चा की जाती हैं इसी के साथ जीवन में हमारे अच्छे कार्य मोक्ष का काम करते हैं पूरे जीवन काल की यादें और एहसास बुढ़ापे में आतेआते बोज बनना शुरू हो जाते हैं

श्रीमद भगवत गीता में श्रीकृष्ण बताते हैं कि जिस प्रकार हम वस्त्र पहनते हैं धीरेधीरे वह मेले और खराब होने लगते हैं हम उन वस्तुओं को उतारकर नए वस्त्र पहन लेते हैं उसी प्रकार हमारे शरीर में भी खराबी आना शुरू हो जाती हैं हमारी यादें सुखदुख का बोझ बढ़ जाता है तो आत्मा नया शरीर ले लेती है पुराने जन्म की यादें भी पुराने शरीर के साथ ही त्याग दी जाती हैं जिस प्रकार हमारा कंप्यूटर और उसका ऑपरेटिंग सिस्टम पुराना हो जाता है तो वह धीमा होता जाता है पर जब उसको रीसेट कर दिया जाता है वह पुरानी सब चीजों को डिलीट करता है तब वह दोबारा तरोताजा हो जाता है 

पुरानी यादें पुराने रिश्ते अगले जन्म में याद रहने से यह भी पुराने दुखों से गिर जाएगा जबकि नए शरीर में बिना याद नया मौका मिलता है अच्छे कर्म काम मोक्ष को प्राप्त कर सकते हैं यही कारण है कि हमें पिछले जन्म का कुछ याद नहीं रहता योगखंड में पुरानी जनम के बारे जान ने में भी बताया गया है

योग आदि क्रियाओं से आत्मा को जानकर ध्यान में पूर्व के जन्मों के ज्ञान की प्राप्ति हो सकती है ज्ञानी पुरुष दूसरों के जन्म के विषय में भी बता सकता है लेकिन इसके लिए ज्ञान पाना पड़ता है साथ ही आत्मा को शुद्ध करना पड़ता है लेकिन श्रीकृष्ण ने यह भी कहा है कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमने किसने जन्म लिए और हमें क्या जात है हमारे जीवन का लक्ष्य मोक्ष को पाना है जिसका मार्ग हर जन्म में एक ही होता है परमात्मा को पा लेना और अपनी आत्मा को विलीन कर लेना इसी से हम इस जन्म से बाहर सकते हैं 

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