महाभारत का युद्ध लगभग 5000 वर्ष पूर्व हुआ था कुरुक्षेत्र में कौरवों और पांडवों के बीच 18 दिन तक चले इस युद्ध में लाखों की संख्या में योद्धाओं ने भाग लिया था पर संयोग की बात तो यह है कि 18 दिन तक चले इस युद्ध में केवल 18 ही महारथी बचे थे इस भयानक युद्ध में कौरवों के कुल का नाश हो गया था और पांडवों के भी लगभग सभी पुत्र मारे गए थे

दोस्तों हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि जब यह युद्ध होना तैयार भी नहीं हुआ था तब से ही यह 7 लोग जानते थे कि युद्ध होगा और इसका क्या परिणाम होगा जी हां दोस्तों इन 7 लोगों को युद्ध के परिणाम के बारे में पहले से ही पता था मतलब पांडवों की जीत के बारे में पहले से ही जानते थे उनमें से सबसे पहले हैं श्री कृष्ण यह बात तो सभी जानते हैं कि श्रीकृष्ण को युद्ध होने और इसका क्या परिणाम होगा इसके बारे में सबसे पहले जानकारी थी महाभारत काव्य में एक किस्सा ऐसा भी आता है जब शीत युद्ध के कुछ दिन पहले द्रौपदी को युद्ध के परिणाम के बारे में बताते हैं और साथ ही उसके पांच पुत्रों के वध हो जाने के बारे में भी बताते हैं जिसे सुनकर दुख से भर जाता है 

भीष्मपितामह को दिव्य दृष्टि प्राप्त थी और वह भी जानते थे कि युद्ध क्या है और इसका क्या परिणाम होगा वह भी यह जानते थे परंतु उन्हें दुख इस बात का था कि उन्हें कौरवों की ओर से युद्ध लड़ना था क्योंकि वह राज सिंहासन और हस्तिनापुर से बंद थे और उस समय हस्तिनापुर पर कोरवो का शासन था जिस कारण वह ना चाहते हुए भी कौरवों के साथ और पांडवों के विरुद्ध थे 

ऋषि वेद व्यास ऋषि वेद दिव्य दृष्टि प्राप्त ऋषिओ में से एक थे वह भी यह जानते थे कि युद्ध है परंतु फिर भी उन्होंने धृतराष्ट्र को संकेत में समझाना था कि अभी भी वक्त है तुम इस युद्ध को रोक दो अन्यथा तुम्हारे कुल का नाश हो जाएगा पर धृतराष्ट्र वेदव्यास जी की इस बात को समझ नहीं पाए जिसका नतीजा युद्ध हुआ और युद्ध में उनके कुल का नाश हो गया 

सहदेव पांडवों में एकमात्र त्रिकालदर्शी थे जो भविष्य में होने वाली घटना को पहले से ही जान लेते थे वह जानते थे कि महाभारत होने वाली है और कौन किसको मारेगा और कौन विजय होगा लेकिन भगवान कृष्ण ने श्राप दिया था इस बात के बारे में लोगों को बताएंगे तो उनकी मृत्यु हो जाएगी 

यह भी कहा जाता है कि संजीव को युद्ध का क्या परिणाम होगा इसका ज्ञान था संजय को महर्षि वेदव्यास ने दिव्य दृष्टि प्रदान की थी ताकि वह महल में बैठे हुए युद्ध को देख सकेंऔर उसका वरणन धूतरास्त्र को कर सके धूतरास्त्र ने वेदव्यासजी को पूछा था इस युद्ध का परिणाम बताते हे तो आपकी बहुत कृपा होगी तब वेदव्यास जी कहते हैं जो पेड़ छाया नहीं देते उनका काट जाना ही उचित है तब पूछते हैं कि कटेगा कौनतब वेदव्यासजी कहते हे इसका उत्तर संजय से पूछ लेना संजय श्री कृष्ण के भक्त थे और धूतरास्त्र के मंत्री भी थे

 द्रोणाचार्य गुरु द्रोणाचार्य कौरवों और पांडवों के गुरु द्रोणाचार्य भी जानते थे कि जिधर श्री कृष्ण है जीत उधर के पक्ष की होगी द्रोणाचार्य को भी दिव्य दृष्टि प्राप्त होने की बात कही जाती है देव गुरु बृहस्पति ने द्रोणाचार्य के रूप में जन्म लिया था 

कृपाचार्य यह भी कहा जाता है कि कृपाचार्य को भी युद्ध के परिणाम का अनुमान था संभवत ही उन्हें दिव्य दृष्टि भी प्राप्त थी क्योंकि श्री कृष्ण के विश्वरूप का दर्शन वही लोग कर सकते थे जिनके पास दिव्य दृष्टि थी कृपाचार्य जी श्री कृष्ण के रूप का दर्शन किया था तो दोस्तों यह 7 लोग जिन्हें महाभारत का युद्ध होने से पहले ही पांडवों की जीत के बारे में पता था अगर आप महाभारत के बारे में और भी ज्यादा जाना चाहते हैं तो हमसे जुड़े रहे 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *