दिव्य शक्तियों से परिपूर्ण राम भक्त हनुमान जी को कौन नहीं जानता और कौन नहीं समझता है राम भक्त हनुमान जी सर्वगुण संपन्न बाल ब्रह्मचारी हर प्रकार के कठिन से कठिन कार्य करने के लिए सदा तत्पर रहने वाले हैं हनुमान जी एक ऐसे महान देवता है जो आज कलयुग के निराशावादी जीवन में भी उत्साह का संचार करते हैं हनुमान जी कलयुग में आदर्श जीवन कैसे जिया जाए इसकी प्रेरणा प्रदान करते हैं 

हनुमान जी का जीवन चरित्र उच्च आदर्शों वाला था उनका जीवन व् भक्ति नि स्वार्थ थी और वही शेषनाग वह पहला सर्प था जो अपनी मां कंदुरु के खिलाफ गया क्योंकि उसने भिन्नता यानी गरुड़ की मां पर कब्जा कर लिया था उन्होंने भगवान ब्रह्मा का ध्यान किया और उन्हें आशीर्वाद के रूप में असीमित शक्ति प्राप्त कि उन्हें आदिश के नाम से भी जाना जाता है आदि का अर्थ है पहला और शेष का अर्थ है कल्प के अंत के बाद 

शेषनाग के 2 अवतारों का जिक्र रामायण और महाभारत में मिलता है रामायण में शेषनाग के अवतार थे भगवान राम के छोटे भाई लक्ष्मण और महाभारत में शेषनाग के अवतार थे भगवान कृष्ण के बड़े भाई बलराम दोस्तों महाभारत में हनुमान जी और शेषनाग अवतार बलराम जी के पुत्र प्रशांत मिलता है

क्या हुआ जब हनुमान जी और शेषनाग अवतारी बलराम जी के बीच युद्ध हुआ कौन विजई हुआ एक बार श्री बलराम जी को अपनी शक्ति पर अभिमान हो गया था जिसे उनके भ्राता कृष्ण जान गए थे इसलिए उन्होंने हनुमान जी का स्मरण किया तत्काल हनुमान जी द्वारका आ गए और जान गए कि श्री कृष्ण क्यों बुलाया है श्री कृष्ण और श्रीराम दोनों एक ही है

वह भी जानते थे इसलिए सीधे राज दरबार न गए कुछ कौतुब करने के लिए उद्यान में चले गए वृक्षों पर लगे फल तोड़ने लगे कुछ खाए कुछ फेंक दिए वृक्षों को काट देगा उसको तो डाला बाग भी वीराना बना दिया फल तोड़ना और फेंक देना हनुमान जी का मकसद नहीं था वह तो श्रीकृष्ण के संकेत से  कर रहे थे बात बलरामजी तक पहुंची किसी वानर ने राजउद्यान को उखाड़  दिया है बलराम जी अत्यंत क्रोधित हुए और बोले चलो देखता हूं कौन है यह मुर्ख वानर जिसने ऐसा दुशाहस किया

बलराम जी जब बाग में पहुंचे तो वहां का मंजर देख और अधिक क्रोधित हो गए उन्होंने देखा कि एक वानर पूरी बाग को तहस-नहस करने की बाद आराम से फल खा रहा है बलराम जी उसके समीप जाकर बोले मुर्ख वानर यहां क्या कर रहा है चला जा यहां से वरना मेरे गदा के प्रहार से मूर्छित हो जाएगा हनुमान जी ने कहा मुझे तो भूख लगी है और मैं यहां से अपना पेट भर कर ही जाऊंगा

हनुमान जी के वचनों को सुन कर रहा नहीं गया उन्होंने गदा उठाई और हनुमान जी पर प्रहार किया इतने में हनुमान जी ने भी अपनी गदा अपने हाथों में ले लिया और प्रहार रोक रोक दिया बलराम जी ने हैरानी भरी नजरों से देखा और सोचा कौन हे ये बानर जिसने मेरे प्रहार को रोक दिया उन्होंने दूसरा प्रहार किया उसे भी रोक दिया फिर क्या था हनुमानजी और बलरामजी के बिच भयंकर युद्ध शरू हो गया कभी हनुमान जी भारी पड़ रहे थे तो कभी बलराम जी बलराम का क्रोध अपनी सीमाओं को पार कर रहा था उन्होंने गदा छोड़ दिया और अपने हल को आह्वान किया 

देवताओं में भी चिंता होने लगी कि अब क्या होगा तभी भगवान कृष्ण वहा प्रकट हुए और बलराम जी को शांत कराया जब बलराम जी को यह पता चला कि कोई और नहीं स्वयं हनुमान जी हैं तब उन्हें अपनी गलती का एहसास हुआ भगवान कृष्ण ने बताया कि मैं आपको कई दिनों से देख रहा हूं आपको अपनी शक्ति पर अभिमान हो गया था इसलिए मैंने हनुमान जी से ऐसा करने को कहा इस पर बलराम जी ने अपनी भूल स्वीकार की