पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा या आश्विन पूर्णिमा कहते हैं. इस पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है. इस शरद पूर्णिमा पर भगवान श्री विष्णु के साथ मां लक्ष्मी की पूजा की जाती है. इस साल शरद पूर्णिमा 19 अक्टूबर को है. कहा जाता है कि इस दिन भगवान इंद्र, मां लक्ष्मी के साथ एरावत पर बैठकर धरती पर विचरण करने आते हैं और यह देखते हैं कि यहां पर कौन जाग रहा है.

शरद पूर्णिमा के दिन ही शरद ऋतु प्रारंभ होती है. इस दिन मां लक्ष्मी धरती पर विचरण करती हैं. इसलिए शरद पूर्णिमा को कोजागरी पूर्णिमा भी कहते हैं. मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी का जन्म हुआ था. इसलिए शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की पूजा से विशेष लाभ होता है. मां की कृपा से घर में सुख समृद्धि आती है.

शरद पूणिमा के दिन चंद्रमा की भी पूजा की जाती है और पूजा के अंत में चंद्रमा को अर्घ्य दिया जाता है. उन्हें गाय के दूध और चावल की खीर बनाकर भोग लगाया जाता है. इसके बाद इस खीर को रात में खुले आसमान के नीचे रख देते हैं. मान्यता है कि रात में चंद्रमा द्वारा अमृत वर्षा की जाती है पर इसके पीछे का तर्क है कि दूध में भरपूर मात्रा में लैक्टिक एसिड होता है. इस कारण चांद की चमकदार रोशनी दूध में पहले से मौजूद बैक्टिरिया को बढ़ाने में सहायक होती है. वहीं, खीर में पड़े चावल इस काम को और आसान बना देते हैं. चावलों में पाए जाने वाला स्टार्च इसमें मदद करते हैं.

इसके साथ ही, कहते हैं कि चांदी के बर्तन में रोग-प्रतिरोधक क्षमता अधिक होती है. इससे यह खीर अमृतमयी हो जाती है. अगले दिन सुबह इस खीर को प्रसाद स्वरूप परिवार के सभी लोगों में बांटी जाती है. मान्यता है कि इसके खाने से घर परिवार की सारी समस्याएं दूर हो जाती हैं.

पूर्णिमा तिथि का आरंभ: शाम 7 बजे

पूर्णिमा तिथि का समापन: रात 08:20 बजे

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