सत्य सनातन धर्म किसी दुनिया का सबसे प्राचीन धर्म कहा जाता है आज भी इसे मानने वालों की संख्या 100 करोड़ से ज्यादा है सनातन धर्म ने अपने समकालीन कई धर्म को बनते हुए देखा और खत्म होते हुए भी देखा लेकिन आज जितनी कोशिश इसके अस्तित्व को मिटाने की हो रही है शायद उतनी कभी नहीं हुई एक बहुत बड़ा प्रोपेगेंडा चल रहा है जिसमें सनातन धर्म की जुठ फेलाई जा रहे हैं इसी की वजह से आज सनातन धर्म बर्बाद होता जा रहा है अगर हमें अपने धर्म को सही दिशा देनी है तो जल्द से जल्द इनसे पार पानी होगी 

सबसे पहला छूठ जिसे हम आज भी सच मानते हैं कि सनातन धर्म का कोई मुख्य धर्म ग्रंथ नहीं है या हम कहते हैं वेद पुराण महाभारत और रामायण सब ही हमारे धर्म ग्रंथ हैं जब भी कोई हमसे धर्म पर सवाल पूछता है तो हम उसे सच बता ही नहीं पाती जैसे ईसाई धर्म का ग्रंथ बाइबिल है इस्लाम धर्म का ग्रंथ है कुरान हमारी धर्म का मुख्य ग्रंथ क्या है

तो इसका जवाब है वेद इसी कारण से वैदिक धर्म भी कहा जाता है ऋग्वेद यजुर्वेद सामवेद अथर्ववेद यह चार वेद हैं हम पुराणों को भी अपना धर्म ग्रंथ मानते हैं जो पूरी तरह से झूठ है वेदों के ज्ञान को ईश्वर की वाणी कहा गया है जबकि पुराणों को पूरा कहानी समय के साथ बने ऐतिहासिक घटनाओं की ज्यादा जानकारी देने के लिए इसे बहुत बाद में बनाया गया इसको हम धर्म ग्रंथ नहीं कह सकते जबकि महाभारत और रामायण हमारा इतिहास है 

महाभारत का मुख्य केंद्र श्रीमद्भगवद्गीता जिसे हम सनातन धर्म का ज्ञान पुनः जागृत करना कह सकते हैं जो उस समय के साथ भूलाया गया था तो आप अगर आपसे कोई पूछे कि क्या पुराण की कथाएं ही हमारा धार्मिक ग्रंथ है तो आप कहना हमारा धर्म वैदिक धर्म सनातन धर्म है इसलिए पुराणों से ज्यादा अहमियत हमें वेद को देनी चाहिए 

एक और बड़ा झूठ जो हमें बताया जाता है कि सनातन धर्म में शुरू से ही जाति प्रथा रही है और हम जन्म से जाति में आ जाती हैं जो गलत है वैदिक काल से ही जो जैसा कार्य करता था उसे वैसे ही वर्ग में रखा जाता था इस तरह 4 वर्ग थे ब्राह्मण क्षत्रिय वैश्य और शूद्र यानी जब कोई अपना कार्य छोड़कर दूसरे कार्य में जाता था तो उसे उसी वर्ग में बदल दिया जाता था जैसे कोई शुद्ध जब राज महल में सिपाही बन जाता तो वह छत्रिय कहलाते और कोई ब्राह्मण अपना काम छोड़कर जो काम अपनाता था उसका वही वर्ग का कहलाता लेकिन समय के साथ किसी जाति में अपने फायदे के लिए बदला गया

मुगल काल में सनातन धर्म की एकता को तोड़ना आसान नहीं था लेकिन जातियों में बटे होने के कारण हम अलग होते गए आज भी हम जाति के नाम पर तो लड़ पढ़ते हैं लेकिन सनातन धर्म की रक्षा के लिए एक होना हो तो हमें सांप सूंघ जाता है क्या आपको नहीं लगता ये भविष्य में धर्म के लिए खतरा बन सकता है 

सनातन धर्म में सबसे बड़ा झूठ जो बताया जाता है कि शिवलिंग जिसकी पूजा वैदिक काल से चली आ रही है उसे शारीरिक अंग तक कहा जाने लगा है दूसरे धर्म के लोगों को ही नहीं बल्कि इसका ज्ञान तो कई सनातन धर्म को मानने वालों को भी नहीं है वेदों में शिवलिंग का अर्थ है शिव का प्रतीक जैसी पुलिंग का अर्थ होता है पुरुष का प्रतीक और स्त्री लिंग का अर्थ होता है स्त्री का प्रतीक वैदिक काल में इस अंडाकार आकार को अनंत का प्रतीक माना जाता था यानी सदाशिव जो समय से बाहर हैं उनका ना कोई रंग रूप है ना ही आकार है उनको अंडाकार रूप में पूजा जाता था यानी अनंत रूप में लेकिन आज इसका गलत मतलब तक निकाल कर इस की कथाएं भी बना दी गई हैं जो गलत है शिवलिंग अनंत सदाशिव का पवित्र प्रतीक है जो हमें पता होना चाहिए तो अगर अब कोई आपको शिवलिंग का गलत अर्थ बताएं तो उसे सही जरूर करिएगा तो यह थे कुछ ऐसे झूठ जो सनातन धर्म को बर्बाद कर रहे हैं सनातन धर्म का भविष्य अब हमारे हाथो में हे 

यह सिर्फ जानकारी के लिए हे इस atrical से किसी को भी ठेस पोहचना हमारा उदेश्य नहीं हे