सूर्य देव को जल चढ़ाते समय भूल से भी ना करें यह गलतियां पुराणों के अनुसार कहा जाता है कि संसार के समस्त मानव को स्नान करने के पश्चात सूर्य देव का अवश्य जल चढ़ाना चाहिए तांबे के लोटे से जल चढ़ाना बहुत ही अच्छा माना जाता है जड़ के साथ अक्षत एवं फूल मिश्रित कर सूर्य देव को जल चढ़ाने से सूर्य देव बहुत ही जल्दी प्रसन्न होते हैं जल को चढ़ाते समय सूर्य देव के मंत्र का उच्चारण भी करना चाहिए इससे मन में सकारात्मक ऊर्जा प्रवेश करती है 

जिन लोगों का स्वास्थ्य अक्सर खराब होता है यदि वे लोग हर सुबह स्नान करने के उपरांत सूर्य देव को जल चढ़ाते हैं तो उनको स्वास्थ्य से संबंधित जितनी भी समस्या होती है उन सभी का निवारण प्राप्त हो सकता है बहुत से लोगों की कुंडली में सूर्य की दशा ठीक नहीं होती इन लोगों को अवश्य ही रोजाना स्नान करने के पश्चात सूर्य देव को जल चढ़ाना चाहिए इससे उनके घर में जो भी खराबी है उसमें सुधार आ सकता है 

अब बात करते हैं सूर्य देव को जल चढ़ाते समय हमें किन बातों का ध्यान रखना चाहिए यदि आप सूर्य देव को जल चढ़ाते समय यह गलतियां कर रहे हैं तो चढ़ाना और ना चढ़ाना एक समान है आइए जानते हैं सूर्य देव को जल चढ़ाते समय होने वाली गलतियों के बारे में हो सकता है कि गलतियों के कारण रोजाना सूर्य देव को जल देने से भी आप को किसी भी तरह का कोई लाभ प्राप्त नहीं हो पा रहा है 

सबसे पहली बात पूर्व की ओर मुख रखें सूर्य देव को हमेशा पूर्व की ओर मुख करके जल चढ़ाना चाहिए हमेशा सूर्य की दिशा जब पूर्व की ओर हो उस वक्त ही जल चढ़ाने का प्रयत्न करना चाहिए जल चढ़ाते समय उस जल के छींटे आपके पैरों के ऊपर नहीं पड़नी चाहिए हमेशा इस बात का ध्यान रखें आप जहा से भी जल चढ़ा रहे हैं उस स्थान से सूर्य देव को देने वाले जल आपके पैर में किसी भी हाल में नहीं गिरना चाहिए अगर जल चढ़ाते वक्त आपके पैर में वह जल गिरता है तो यह अच्छी बात नहीं है क्योंकि इससे सूर्य देव क्रोधित होते हैं आपके ऊपर अशुभ दृष्टि पड़ सकती है 

सूर्य देव को जल चढ़ाते समय सूर्य देव के मंत्र का जाप करें ओम सूर्याय नमः बिना स्नान किए जल चढ़ाना यह गलती ना करें कि बिना स्नान की सूर्य देव को जल चढ़ा रहे है यदि आप बिना स्नान किए जल चढ़ाएंगे तो आप जिस कारण से जल चढ़ा रहे थे उसमें असफल हो जाएंगे प्लास्टिक पात्र का उपयोग आज प्लास्टिक का बोरा फैशन चल रहा है प्लास्टिक की किसी भी प्रकार की चीजों से सूर्य देव को जल बिल्कुल भी अर्पित ना करें इसके अलावा स्टील पीतल कांच इत्यादि पात्रों का भी प्रयोग ना करें सूर्य देव को जल चढ़ाने के लिए हमेशा ताम्रपत्र का प्रयोग करना चाहिए इसके पीछे वैज्ञानिक कारण यह भी है सूर्य देव की उष्णता से प्लास्टिक से कुछ जहरीली गैस निकलती है जो हमारी सेहत के लिए भी अच्छी नहीं होती 

ब्रह्म मुहूर्त में ही अर्पित करें जल कोशिश करें कि ब्रह्म मुहूर्त में ही आप सूर्य देव को जल अर्पित करें ब्रह्म मुहूर्त का समय अर्थात सुबह के 3:00 से 5:00 बजे का समय सूर्य देव को जल अर्पण करने का सबसे अच्छा समय माना जाता है जल चढ़ाने से पूर्व आप की नियमित क्रियाकलाप भी पूर्ण होनी चाहिए आप स्वत्छ वस्त्र पहनकर ही सूर्य को अर्घ्य दें ऐसा करने से नवग्रह की कृपा जल चढ़ाने वाले व्यक्ति के ऊपर सदैव बनी रहती है 

सूर्य देव को जल चढ़ाते समय जल में अक्षत फूल अवश्य होना चाहिए अगर आपके पास कुछ भी नहीं है तो अक्षत  से काम चला सकते हैं हमेशा अपने हाथ को सिर के ऊपर रखकर ही सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए जब जल की धारा सूर्य देव का अर्पित करती है तो उसी धारा से देव को देखना चाहिए कहा जाता है कि ऐसा करने से व्यक्ति के ऊपर सूर्य देव की कृपा बनी रहती है 

आपके पैर में चप्पल होनी नहीं चाहिए यदि आप सूर्य देव को चप्पल पहनकर जल अर्पण करेंगे तो आप से रुष्ट हो जाएंगे और आप के जितने भी काम रूके हुए हैं वह सभी काम भी आगे नहीं बढ़ पाएंगे इसलिए हमेशा सूर्य देव को नंगे पैरों में रहकर ही जल अर्पित करें रविवार के दिन अवश्य जल चढ़ाएं आप हर दिन सूर्य देव को जल चढ़ाएं न चढ़ाएं लेकिन सूर्य को जल चढ़ाना चाहिए क्योंकि रविवार का दिन सूर्य भगवान का दिन होता है इस दिन को अवश्य ही हर व्यक्ति को सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए आपकी कुंडली में किसी प्रकार का कोई सूर्य दोष हे तो दोष गुण में परिवर्तित हो जाएगा आप सूर्य देव को जल चढ़ाते हैं तो इस बात का ध्यान रखें कि आप रविवार के दिन मांसाहार का सेवन ना करें लाल रंग की सब्जी मसूर की दाल ना खाएं लाल कपड़े भी ना पहने यह तमाम बातें जो सूर्य देव को जल चढ़ाते समय ध्यान में रखनी चाहिए