आज आप जानेंगे भारत की सबसे रहस्यमई मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के बारे में जिसे जिसने भी देखा वह दंग रह गया यहां तक कि विज्ञान जगत भी नहीं समझ पाया कि आखिर इस मंदिर में चमत्कार होता कैसे हैं तो चलिए जयपुर की सीमा रेखा पर दौसा जिले में स्थित मेहंदीपुर में बालाजी का एक अति प्रसिद्ध तथा प्रख्यात मंदिर है जिसे श्री मेहंदीपुर बालाजी मंदिर के नाम से जाना जाता है

यहाँ नास्तिक भी बालाजी के चमत्कार देखकर आस्तिक बन जाते हैं दो पहाड़ियों के बीच बालाजी का मंदिर बना हुआ है जिसे घाटे वाले बालाजी के नाम से भी पुकारा जाता है इस मंदिर में हनुमान जी बल रूप में विराजमान है जो अपने आप पहाड़ी के पत्थर से बने हुए हैं इस मूर्ति  की तर्ज पर बाकी मंदिर का निर्माण किया गया है घाटे वाले बाबा जी के अलावा यहां प्रेतराज सरकार और भैरवनाथ का मंदिर हे

भक्तों की पीड़ा हर दुख और कष्ट ग्रस्त व्यक्ति को मंदिर पहुंचकर तीनों देवताओं को प्रसाद चढ़ाना पड़ता है बालाजी को लड्डू प्रेतराज सरकार को चावल और कोतवाल कप्तान को प्रसाद चढ़ाया जाता है इस प्रसाद में से दो लड्डू रोगी को खिलाए जाते हैं और शेष प्रसाद पशु पक्षियों में डाल दिया जाता है अब जानते हैं मेहंदीपुर बालाजी से जुड़े 10 रहस्य के बारे में

यह मंत्रियों की बीच की घाटी में स्थित होने के कारण इसे घाटा मेहंदीपुर कहते हैं यहां पर एक विशाल चट्टान में हनुमान जी की आरती स्वयं ही उभर आई थी इसी को ध्यान में रखते हुए बाद में यहां मंदिर का निर्माण किया गया था इस मंदिर की मूर्ति करीबन 1000 साल पुरानी है लेकिन यह मंदिर २०वी शताब्दी  में गया था

कहा जाता है कि कई सालों पहले हनुमान जी और प्रेतराज अरावली पर्वत पर प्रकट हुए थे जहां बुरी आत्माओं और काला जादू से पीड़ित लोगों से छुटकारा पाने लोग यहां आते थे इस मंदिर को इनसे मुक्ति का एकमात्र मार्ग माना जाता है मंदिर के पंडित इन रोगों से मुक्ति के लिए कई उपचार बताते हैं ऐसे लोग यहां पर बिना दवा और बिना तंत्र मंत्र के स्वस्थ होकर लौटते हैं 

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस मंदिर के देवता को दिव्य शक्ति प्राप्त है जिससे मनुष्य को दुष्ट आत्माओं से मुक्ति दिलाई जाती है ऐसा भी कहा जाता है कि श्री बालाजी महाराज अपने भक्तों की प्रतिकूल ग्रह दिशाओं को भी ठीक करते हैं इसके साथ भगवान श्री बालाजी केवल अपने भक्तों के संकट हरण करते हैं बल्कि उन्हें रिद्धि और सिद्धि प्रदान करते हैं

मंदिर ऐसी जगह पर बना हुआ है जहां प्राचीन काल में बहुत हिंसक जंगल हुआ करता था कथाओं के अनुसार भगवान बालाजी और श्री प्रेतराज सरकार की मूर्ति यह अरावली की पहाड़ियों पर करीब 1000 साल पहले प्रगट हुई थी ऐसा कहा जाता है कि 1 महंत को सपना आया था जिसमें श्री बालाजी महाराज ने 3 देवताओं और दिव्या बालाजी हनुमान जी ने सेवा करने का आदेश दिया था इसके बाद उन को बालाजी ने  दर्शन दिए और जंगल में स्थान दिखाया जहां तीनों देवताओं का मंदिर था और महंत ने यही पूजा करनी शुरू कर दी 

कहा जाता है कि मुस्लिम शासन काल में इस मूर्ति को नष्ट करने का प्रयास किया लेकिन हर बार असफल रहे 

हनुमानजी की सीने में एक छोटा सा छेद है जिसमें से निरंतर पानी की धारा बहती रहती है यह जल बालाजी के चरणों तले स्थित एक कुंड में एकत्रित होता रहता है जिसे भक्तजन चरणामृत के रूप में अपने साथ ले जाते हैं 

प्रसाद का लड्डू खाते ही रोगी झूमे लगता है भूत प्रेत आदि स्वयं ही उसके शरीर में आकर चिल्लाने लगते हैं कभी वह अपना सर घूम आता है कभी जमीन पर पटकने लगता है पीड़ित लोग यहां पर अपने आप जो करते हैं वह एक सामान्य आदमी के लिए संभव नहीं है इस तरह की प्रक्रियाओं के बाद वह बालाजी की शरण में जाता है फिर उसे हमेशा के लिए इस तरह की परेशानियों से मुक्ति मिल जाती है कई गंभीर रोगियों को लोहे की जंजीर से बांधकर मंदिर में लाया जाता है यहां पर आने वाले पीड़ित व्यक्ति को देखकर सामान्य लोगों की रूह तक काप  जाती है 

यह लोग मंदिर के सामने चिल्ला चिल्ला कर अपने अंदर बैठी बुरी आत्माओं के बारे में बताते हैं जिनके बारे में इनका दूरदूर तक कोई वास्ता नहीं रहता भूत प्रेत ऊपरी बाधाओं के निवारण हेतु यहां पर आने वालों का तांता लगा ही रहता है ऐसे लोग यहां पर बिना दवा और तंत्र मंत्र के स्वस्थ होकर लौटते हैं 

मेडिकल साइंस और शोधकर्ता ऐसी बीमारियों के इलाज के तरीकों को नहीं मानते हैं और उसे अंधविश्वास कहते हैं लेकिन बालाजी की पूजा करने वालों के लिए अध्यात्म विज्ञान की समस्या से परे हे प्रेतराज सरकार को दुष्ट आत्माओं को दंड देने वाले देवता के रूप में पूजा जाता है सरकार को पके चावल का भोग लगाया जाता है भक्तजन तीनों देवताओं को बूंदी के लड्डू का भोग लगाते हैं मंदिर के बाहर आकर वह जो दो लड्डू बालाजी भोग में लगाने के बाद मिले थे उन्हें खा लेते हैं 

आपको जानकर आश्चर्य होगा कि से एक बार मंदिर से बाहर निकलने के बाद पीछे नहीं दिखना चाहिए ऐसा इसलिए किया जाता है कि अगर कोई भूत प्रेत आत्मा है आपके पीछे नहीं आई 

यह भी कहा जाता है कि अगर आपने कोई मन्नत मांगी है और वह पूरी हो गई है उसके बाद  एक बार मंदिर के दर्शन जरूर करना चाहिए

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