जम्मू-कश्मीर के तीन दिवसीय दौरे पर आए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने रविवार को यहां के प्रसिद्ध श्री खिर भवानी दुर्गा मंदिर में पूजा-अर्चना, आरती की और मंदिर की परिक्रमा भी की श्रीनगर जिले के तुल्लामुला में स्थित खीर भवानी मंदिर हिंदुओं में एक अत्यंत प्रतिष्ठित मंदिर है. इस स्थान पर बसों और टैक्सियों द्वारा श्रीनगर से मंदिर तक आसानी से पहुँचा जा सकता हैं.

चिनार के पेड़ों से घिरे सुरम्य वातावरण के बीच खीर भवानी मंदिर स्थित है. इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि जब भी कश्मीर पर कोई संकट आता है तो मंदिर का पानी अपना रंग बदल लेता है।मान्यताओं के अनुसार यह मंदिर दैवीय शक्तियों से भरा हुआ है।देवी रागनी को एक प्राकृतिक षटकोणीय वसंत के रूप में दर्शाया गया है जो भक्तों द्वारा अभिनीत है. रागनी देवी के मंदिर को लोकप्रिय रूप से खीर भवानी मंदिर के रूप में जाना जाता है. इस तथ्य के कारण कि श्रद्धालु वसंत ऋतु में  ‘खीर’ प्रसाद के रूप में अर्पित करते हैं. यह भी माना जाता हैं कि मंदिर में उपस्थित कुंड का जल काले रंग में बदल जाता है, जो आने वाली आपदा के बारे संकेत देता है. 

इस मंदिर से जुड़ी मिथक यह है कि रावण देवी खिर भवानी का भक्त था। लेकिन जब रावण ने माता सीता का हरण किया तो खीर भवानी की माता लंका छोड़कर कश्मीर आ गईं। यह भी कहा जाता है कि देवी खीर भवानी की माँ ने राम भक्त हनुमान से उनकी मूर्ति को दूसरी जगह स्थापित करने का अनुरोध किया।माँ भवानी के अनुरोध के कारण, हनुमान ने कश्मीर के तुलमुल में उनकी मूर्ति स्थापित की।

एक अन्य कथा के अनुसार रागनी देवी रघुनाथ गाड्रो नाम के एक पुजारी के सपने में दिखाई दीं और उन्हें अपने धर्मस्थल को वर्तमान स्थान पर स्थानांतरित करने के लिए कहा. इसके बाद मंदिर को तुल्लामुला गाँव में स्थानांतरित कर दिया गया. मूल मंदिर का निर्माण महाराणा प्रताप सिंह ने 1912 में करवाया था. बाद में इसका जीर्णोद्धार महाराजा हरि सिंह ने करवाया. मंदिर परिसर में सफेद संगमरमर में बने छोटे से मंदिर में रागनी देवी की एक प्रतिमा रखी गई हैं. 

मंदिर में शुक्ल पक्ष अष्टमी के अवसर पर एक वार्षिक उत्सव मनाया जाता हैं. इस विशेष दिन भक्त उपवास रखते हैं और देवी की पूजा- अर्चना के लिए मंदिर में इकट्ठा होते हैं. इसी तरह ज्येष्ठ अष्टमी (मई-जून) में लोग देवी के दर्शन के लिए आते हैं. रागनी देवी को प्रसन्न करने के लिए ‘महा यज्ञ’ के साथ त्यौहार का समापन होता हैं. 

मां खीर भवानी के दर्शन करने आए श्रद्धालु मां को खीर चढ़ाते हैं। मान्यता है कि मां के पास खीर होने के कारण खीर भवानी के भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती है.यहां प्रसाद के रूप में भक्तों को खीर दी जाती है.

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