हर साल अहोई अष्टमी के मौके पर राधा कुंड में बड़े मेले का आयोजन होता है. साथ ही अहोई अष्टमी से पहले की रात में शाही स्नान किया जाता है. मान्यता है कि इस रात्रि में यदि पति और पत्नी संतान प्राप्ति की कामना के साथ इस राधा कुंड में डुबकी लगाएं और अहोई अष्टमी का निर्जल व्रत रखें, तो उनके घर में जल्द ही किलकारियां गूंजती हैं.

इसके अलावा जिन दंपति को यहां स्नान के बाद संतान प्राप्ति हो जाती है, वे भी इस दिन अपनी संतान के साथ यहां राधा रानी की शरण में हाजरी लगाने आते हैं और इस कुंड में स्नान करते हैं. माना जाता है कि राधा कुंड में अहोई अष्टमी के दिन स्नान की ये परंपरा द्वापरयुग से चली आ रही है.

राधाकुंड (मथुरा)। संतान प्राप्ति के लिए मन में अटूट आस्था लेकर लाखों दंपती बृहस्पतिवार की आधी रात संतान प्राप्ति के लिए राधारानी कुंड में स्नान करेंगे। देश के कोने-कोने से श्रद्धालु राधाकुंड पहुंच चुके हैं। प्रशासन ने भी मेले की तैयारियों को अंतिम रूप दिया है।
पुराणों में लिखा है कि कार्तिक मास में अष्टमी के दिन राधाकुंड का निर्माण राधारानी ने अपने कंगन से किया था।

कृष्ण कुंड का निर्माण भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी बंसी से किया था। मान्यता है कि अहोई अष्टमी की आधी रात को जो नि:संतान दंपती हाथ पकड़ कर तीन डुबकी लगाते है और कुंड में पैंठे का फल लाल कपड़े में बांध कर दान करते हैं। उन्हें वर्ष भर में पुत्र रत्न की प्राप्ति होती है। बृहस्पतिवार की रात 11:53 बजे से विशेष स्नान प्रारंभ होगा। जो सुबह 4 बजे तक चलेगा।

राधाकुंड और श्यामकुंड की विशेषता

मान्यता है कि राधा रानी ने इस कुंड को अपने कंगन से खोदा था राधाकुंड व श्याम कुंड की मान्यता यह है कि दोनों कुंडों का जल अलग-अलग रंग का है। राधारानी कुंड का जल सफेद, जबकि भगवान श्याम सुंदर के कुंड के जल का रंग श्याम है। राधारानी का कुंड आयताकार है। भगवान श्याम सुंदर का कुंड भगवान के मुकुट जैसा आकार लिए है।

अहोई अष्टमी मेले में देश के कोने-कोने से लाखों श्रद्धालु पहुंचेंगे।

 

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