सदियों से यह हमारी मान्यता रही है की प्राचीन समय में इस धरती के अलग-अलग हिस्सों में स्तिथ कई आदिवासी समुदाय नरभक्षी थे हालांकि इसके कोई ठोस सबूत हमारे पास नहीं थे। वर्तमान समय में भी यदा-कदा इंसानों के द्वारा इंसानो का मांस खाने की घटनाएं होती रहती है। लेकिन अब वैज्ञानिको ने सबूत सहित यह साबित कर दिया है की एक दौर में हमारे पूर्वज नरभक्षी थे और इंसानो द्वारा एक दूसरे को मारकर खाना आम बात थी।  यह खोज इंग्लैंड में हुई है। नई खोज में इंसानों की हड्डियों पर इंसानों के दांत के निशान भी मिले हैं।

इंग्लैंड के सॉमरसेट में स्थित एक गुफा से 1992 में वैज्ञानिकों को कुछ अवशेष मिले थे। इन्हीं अवशेषों पर पिछले कई सालों से वैज्ञानिक स्टडी कर रहे थे। लंदन के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम की सिल्विया बेलो कहती हैं कि उनकी टीम ने वह सब कुछ हासिल किया है जो इससे पहले कहीं किसी रिकॉर्ड में नहीं था।

रेडियोकार्बन डेटिंग नामक टेक्नोलॉजी से साइंटिस्ट को मालूम चला कि ‘गफ गुफा’ में मिले इंसानी अवशेष करीब 15,000 साल पुराने हैं। सेल्विया कहती हैं कि यहां पर इंसानों को काटने, मांस और हड्डियां चबाने के भी सबूत मिले हैं। वैज्ञानिकों के इस स्टडी का विस्तार से अध्ययन करने के बाद कहा जा रहा है कि पूर्वजों के बीच इंसानों का मांस खाना आम बात थी।

स्टडी में शामिल और यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन के प्रोफेसर सिमॉन पैरफिट कहते हैं कि इस समय काल की खास बात यह भी है कि यहां अपवाद स्वरुप ही आदमियों की कब्रेें मिलती है। इससे इस बात के संकेत मिलते हैं कि आदमियों के मांस को खा लिया जाता था। इतना ही नहीं रिसर्च से यह बात भी सामने आई है कि इंसानों के अवशेष दूसरे घरेलू अवशेषों के साथ ही पाए गए।

आगे यह स्टडी जारी है और साइंटिस्ट आने वाले दिनों में नरभक्षी होने से जुड़े और भी तथ्य सामने ला सकते हैं।