मनु स्मृति मे महाराज मनु ने पूजा में प्रयोग की जाने वाली अलग-अलग धातुओं के बारे में बताया है। महाराज मनु ने 3 ऐसी धातुओं के बारे में बताया है जिनका उपयोग पूजा में भूलकर भी नहीं करना चाहिए, साथ ही उन्होंने कुछ ऐसी धातुओं के महत्व के बारे में भी बताया है, जिन्हें पूजा में शार्मिल करना शुभ होता है।

 

श्लोक-
निलेप कांचनं भांडमभिरेव विशुद्धयपि।
अब्जमश्ममयंचैव राजतं चानुपस्कृतम्।।

पहली धातु – एल्युमिनियम

एल्युमिनियम के बने पात्र का उपयोग पूजा में नहीं करना चाहिए क्योंकि इसे रगड़ने पर इसका कालिख निकलने लगता हैं।

दूसरी धातु – स्टेनलैस स्टील
स्टेनलैस स्टील के बने पात्र प्राकृतिक धातु न होने के कारण अपवित्र माने जाते है, इसलिए पूजा में इनका उपयोग भी वर्जित है।

तीसरी धातु – लोहा

लोहे के बने पात्र में हवा और पानी के संपर्क में आने पर जंग लग जाती है, इसलिए इनका उपयोग भी पूजा में नहीं करना चाहिए।

इन धातुओं के बने बर्तन का उपयोग होता है शुभ
पूजा में शंख, सीपी, पत्थर और चांदी के बने पात्रों का उपयोग करना शुभ होता है, क्योंकि ये सभी धातुएं केवल पानी से ही शुद्ध हो जाती है। लेकिन ध्यान रखें कि उन पर किसी तरह की खरोंच या धारियां न हो। साथ ही सोने और चांदी में किसी तरह की मिलावट न हो।

इसके अलावा हम ताम्बें और पीतल के बने पात्रों का उपयोग भी कर सकते है। ये धातुएं भी पूजा में शुभ फलदायक होती है।