ज्योतिष शास्त्र में चंद्र ग्रहण और सूर्य ग्रहण को अशुभ माना गया है। इस दौरान शुभ कार्य, अन्न ग्रहण सहित कई चीजों की मनाई रहती है। ग्रहण का असर सभी जीव-जंतुओं पर पड़ता है। 19 नवंबर 2021 को साल का आखिरी चंद्र ग्रहण है। 19 नवंबर कार्तिक पूर्णिमा को लगने वाला आंशिक चंद्र ग्रहण है। पिछले कुछ वर्षों में सबसे लम्बी अवधि का चंद्र ग्रहण है।

जिसके कारण खगोलविदों के साथ-साथ ज्योतिषाचार्य में में इसको लेकर विशेष उत्सुकता है। यह चंद्र ग्रहण भारतीय समयानुसार 10 बजकर 59 मिनट पर शुरू होकर दोपहर 3 बजकर 7 मिनट तक रहेगा। लगभग 4 घंटे तक रहने वाला यह आंशिक चंद्र ग्रहण पश्चिम अफ्रीका, पश्चिम यूरोप, उत्तर अमेरिका, दक्षिण अमेरिका और एशिया के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।

भारत में यह केवल अरुणाचल प्रदेश और असम में कुछ समय के लिए ही दिखाई देगा। ज्योतिषाचार्य डॉ पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि शुक्रवार को पड़ रहे इस ग्रहण के समय कृतिका नक्षत्र में चन्द्रमा वृष राशि में होंगे।

वराहमिहिर रचित बृहत् संहिता के अनुसार वृषभ राशि में पड़ने वाले ग्रहण के कारण “दूध का व्यवसाय करने वालों, पशु पालकों, पशुओं का व्यापर करने वालों, महत्वपूर्ण लोगों तथा विशिष्ट लोगों के लिए कष्टकारी हो सकता है। इस चंद्र ग्रहण के कुछ दिनों के भीतर दूध की कीमत में वृद्धि हो सकती है।

ज्योतिषाचार्य डॉ पंडित गणेश शर्मा ने बताया कि ग्रहण के समय सूर्य और चंद्रमा राहु केतु के अक्ष में क्रमश: वृश्चिक और वृष राशी में हैं। वृषभ राशि से प्रभावित बिहार और झारखंड में आसामान्य वर्षा से जान-माल की हानि हो सकती है। राजनीतिक मामलों में भी उथल-पुथल की स्थिति हो सकती है।

चंद्र ग्रहण की कुंडली में जल तत्व की राशि मीन लग्न उदय हो रहा है तथा सूर्य और चंद्र दोनों जल तत्त्व की राशिओं के नवांश में सिथत रहेंगे। जिससे पहाड़ों पर भारी बर्फ पड़ने तथा दक्षिण भारत में भारी वर्षा से मौसम में बड़े बदलाव होंगे। ग्रहण के तुरंत बाद उत्तर भारत में शीत लहर तथा दक्षिण भारत में भारी वर्षा से जन-जीवन प्रभावित होगा और ठंड बढ़ेगी।

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