समाचार एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक़, केंद्र सरकार ने शुक्रवार शाम एक बयान जारी करके बताया कि स्टारलिंक को “भारत में तत्काल प्रभाव से इंटरनेट सेवाएं बुक करने एवं सेवाएं देने से” रोक दिया गया है.

इससे पहले भारत में स्टारलिंक कंपनी के कंट्री डायरेक्टर संजय भार्गव ने हाल में सोशल मीडिया पर बताया था कि देश में उनकी इस सेवा का इस्तेमाल करने के इच्छुक 5,000 से अधिक लोगों ने एडवांस बुकिंग कर ली है. उनके अनुसार, उनकी कंपनी भारत के ग्रामीण इलाक़ों में ब्रॉडबैंड सेवाएं देने के लिए काम करना चाहती है.

स्टारलिंक का लक्ष्य भारत में दिसंबर 2022 से 2 लाख डिश टर्मिनलों के ज़रिए ब्रॉडबैंड इंटरनेट सेवा शुरू करने का लक्ष्य है. स्पेस एक्स ने पूरी दुनिया में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा देने के लिए अब तक 1,700 सैटेलाइट अंतरिक्ष में स्थापित कर दिए हैं. हालांकि उसकी योजना ऐसे लाखों सैटेलाइट को स्पेस में लॉन्च करने की है.

भारत सरकार ने स्टारलिंक की सैटेलाइट इंटरनेट सुविधा का लाभ देने की पेशकश पर रोक इसलिए लगा दी है क्योंकि अभी तक कंपनी को देश में इस तरह की सेवा देने का लाइसेंस नहीं मिला है. और बिना लाइसेंस पाए देश में सैटेलाइट आधारित सेवाएं नहीं दे सकते.

लेकिन कंपनी ने बिना लाइसेंस पाए अपनी सेवाओं की बुकिंग और सेवाओं से जुड़े विज्ञापनों का प्रसारण शुरू कर दिया. इसके असर में आकर कई लोगों ने बुकिंग भी शुरू कर दी. कंट्री हेड ने भी दावा किया कि हज़ारों लोग उसके यहां बुकिंग करा चुके हैं.

केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग ने भी अपने बयान में कहा कि स्टारलिंक की वेबसाइट से स्पष्ट होता है कि वहां जाकर भारत के यूज़र सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं को बुक कर सकते हैं.

इस स्थिति को देखते हुए सरकार को मजबूरन सामने आकर हालात की हक़ीक़त बताकर कंपनी के विज्ञापनों और उसकी बुकिंग पर रोक लगानी पड़ी.

केंद्र सरकार के दूरसंचार विभाग ने शुक्रवार को जारी एक बयान में कहा, ”स्टारलिंक को भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की पेशकश करने के लिए लाइसेंस नहीं मिला है. जनता को सलाह दी जाती है कि वे उन सेवाओं का सब्सक्रिप्शन न लें, जो देश में ज़रूरी लाइसेंस के बिना एलन मस्क की कंपनी प्रचारित कर रही है.”

सरकार ने कंपनी से नियमों का पालन करने यानी ज़रूरी लाइसेंस हासिल करने की प्रक्रिया पूरी करने को कहा है. वैसे कंपनी ने इस महीने की पहली तारीख़ को भारत में अपना पंजीकरण करा लिया है, लेकिन ऐसा करना पर्याप्त नहीं है.

दूरसंचार विभाग ने स्टारलिंक को ज़रूरी नियामक ढांचे का पालन करने और भारत में “तत्काल प्रभाव से” सैटेलाइट इंटरनेट सेवाओं की बुकिंग करने से परहेज़ करने के निर्देश भी दिए.