कभी आपने महसूस किया है कि आपके आंसू निकल रहे हों और आप साथ में हंस रहे हों।

कठिन होता है ऐसा करना, लेकिन जो व्यक्ति जीवन में आपको ऐसा करना सिखा जाए समझ लेना वो ही जीने का असली सलीका सिखाकर गया।

इन्हीं में एक नाम था कानपुर की तंग गलियों से निकले सत्यप्रकाश श्रीवास्तव का।

जो लोग राजू को करीब से जानते थे वो उनके जीने के फंडों से भी काफी वाकिफ थे।

नकारात्मकता को कभी पास न आने देना भी एक कला है और राजू इस कला में माहिर थे। वो कहते थे, जीवन का सही आनंद लेना है

तो भैया जिंदगी की जो भी नकारात्मकता है, उसे सकारात्मक सोच में बदल दो, नहीं तो जी नहीं पाओगे।

इसके साथ ही राजू का हमेशा एक और फंडा रहा कि अपनी कमजोरियों और मजबूरियों को छिपाने की आवश्यकता नहीं है,

बल्कि इन्हें अपनी जीवन शैली का हिस्सा बनाइए, आप देखेंगे कि आपकी यहीं बातें सकारात्मक रूप ले रही हैं।

 राजू श्रीवास्तव 58 साल के थे. उन्हें उस समय कार्डियक अरेस्ट आया था, जब वो दिल्ली के एक जिम में एक्सरसाइज कर रहे थे.